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राज्य कृषि समाचार (State News)

दमोह : समूह बनाकर हरे बैंगन की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान

23 अगस्त 2026, नई दिल्ली: दमोह : समूह बनाकर हरे बैंगन की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान – कृषक मेहनत लगन और जज्बे के साथ कार्य करे तो बहुत कुछ हो सकता है, ऐसे ही एक कृषि विज्ञान केन्द्र दमोह के प्रगतिशील कृषक दमोह जिले के फुटेरा क्षेत्र में किसान समूह बनाकर हरे बैंगन की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। एक किसान को 3–6 लाख रुपये तक की आय हो रही है, जबकि प्रति एकड़ उत्पादन लागत लगभग 50 हजार रुपये आती है। किसानों को खेत पर ही व्यापारी मिल जाने से परिवहन और मंडी संबंधी खर्च/समय भी बचता है। कृषि विज्ञान केंद्र दमोह और उद्यान विभाग की तकनीकी सहायता से यह कृषक आगे बढ़ रहे है।

दमोह जिले की तहसील बटियागढ़ ग्राम फुटेरा निवासी हेमंत  पटेल  प्रमुख सब्जी उत्पादक है। फुटेरा ग्राम के आसपास के गांव में लगभग 100 से 200  कृषक समूह बनाकर  सब्जियों की खेती करते हैं और खासकर इसमें  हरा भटा (बैगन) इसकी मांग बालाघाट ,सिवनी महाराष्ट्र आदि जगहों पर बहुत है, इससे प्रतिदिन एक से दो ट्रक सब्जियां अपने दमोह जिले के ग्राम फुटेरा से प्रतिदिन अन्य जिलों या  राज्यों में जाती हैं । प्रतिदिन  किसान भाई 2000 से 4000 हजार कमा रहे है, ऐसे कृषक तीन चार माह तक प्रतिदिन भटा का विक्रय करते है , इसमें लगभग एक किसान भाई को 3 लाख से लेकर 6 लाख रूपये तक की आय प्राप्त हो जाती है। इसमें लगभग उत्पादन लागत एक एकड़ में 50  हजार रूपये के लगभग आती है। वर्तमान में व्यापारी उनके खेत पर ही आकर सब्जी की खरीदी करते हैं जिससे इनको सब्जियों का रेट अच्छा मिल जाता है ।

श्री पटेल एवं अन्य कृषक प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र दमोह  डॉ मनोज अहिरवार के मार्गदर्शन में उन्नत सब्जी उत्पादन का कार्य कृषकों के समूह बनाकर करते हैं जिससे सब्जी व्यापारियों को सीधे मार्केटिंग करते हैं जिससे कृषकों को सब्जी मंडी नहीं जाना पड़ता है। डॉ. अहिरवार कहते है अगर किसान भाई समूह में कोई भी सब्जी की खेती करते हैं या क्लस्टर बनाकर खेती करते हैं तो उनको रेट अच्छा मिलता है, इसी कारण से आज फुटेरा क्षेत्र के बहुत सारे किसान जो है भटा की खेती में अग्रसर हो रहे हैं और एक अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।  कृषकों को ड्रिप पोली मल्च भी उद्यान विभाग  दमोह द्वारा दिये जाते है।  कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक द्वारा मार्गदर्शन में सभी किसानों को समय-समय पर रोग एवं कीट, उन्नत तकनीकी जानकारी दी जाती है ।

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