डेयरी व्यवसाय से बदली ग्रामीण महिला संध्या की तकदीर, दूध बेचकर हर महीने बचा रहीं ₹15 हजार
10 अक्टूबर 2026, सरगुजा: डेयरी व्यवसाय से बदली ग्रामीण महिला संध्या की तकदीर, दूध बेचकर हर महीने बचा रहीं ₹15 हजार – ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और नियमित आमदनी का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी श्रीमती संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से मिले सहयोग और अपनी मेहनत से डेयरी व्यवसाय को आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। वर्ष 2024 में योजना के तहत मिले अनुदान से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उन्हें प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से हर महीने करीब 30 हजार रुपये की आमदनी होती है। चारा-पानी और अन्य खर्च निकालने के बाद वह लगभग 15 हजार रुपये की बचत कर रही हैं।
वर्ष 2024 में मिला अनुदान, डेयरी व्यवसाय को मिली नई दिशा
संध्या को वर्ष 2024 में छत्तीसगढ़ शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत अनुदान मिला था। इस आर्थिक सहायता से उन्हें गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया। नियमित मेहनत और बेहतर प्रबंधन के जरिए उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपने परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन बना लिया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया और नियमित आमदनी का जरिया भी तैयार हुआ।
रोजाना 30 लीटर दूध, हर महीने 15 हजार रुपये की बचत
संध्या के डेयरी व्यवसाय से वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 1,200 रुपये की आमदनी होती है। इस तरह महीने में लगभग 30 हजार रुपये की आय होती है। पशुओं के चारे, पानी और अन्य जरूरी खर्चों को निकालने के बाद संध्या हर महीने करीब 15 हजार रुपये बचा रही हैं। इस हिसाब से उनकी सालाना बचत लगभग 1.80 लाख रुपये होती है, यदि आय और खर्च का यही स्तर पूरे साल बना रहता है। डेयरी से होने वाली नियमित कमाई ने उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। अब पशुपालन उनके लिए केवल घरेलू गतिविधि नहीं, बल्कि आय अर्जित करने का महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है।
तीन बछियों से डेयरी व्यवसाय बढ़ाने की उम्मीद
संध्या ने अपने मौजूदा डेयरी व्यवसाय के साथ भविष्य में इसे आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। उनकी गायों से तीन बछियां हुई हैं, जिन्हें वह आगे प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं। इन बछियों के बड़े होने से भविष्य में उनके पशुधन में वृद्धि होने की संभावना है। इससे आने वाले समय में दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने के अवसर मिल सकते हैं।
शासकीय योजना से आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान
राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत मिले अनुदान ने संध्या को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया। उन्होंने इस सहायता का उपयोग पशुपालन को नियमित आमदनी का साधन बनाने में किया। संध्या ने योजना के तहत मिले सहयोग के लिए पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विभागीय सहायता से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने और आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिली।
लमगांव की संध्या की कहानी ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों के लिए एक प्रेरक उदाहरण है। शासकीय योजना से मिले सहयोग, पशुओं की देखभाल और निरंतर मेहनत के जरिए उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। दूध की बिक्री से होने वाली नियमित आमदनी उन्हें आर्थिक मजबूती दे रही है, वहीं बढ़ता पशुधन भविष्य में व्यवसाय के विस्तार की उम्मीद भी जगा रहा है।
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