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राज्य कृषि समाचार (State News)

जीरे की खेती में झुलसा रोग का खतरा, इन आसान उपायों से किसान बचा सकते हैं फसल  

15 जनवरी 2026, जयपुर: जीरे की खेती में झुलसा रोग का खतरा, इन आसान उपायों से किसान बचा सकते हैं फसल  – रबी सीजन में जीरे की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस रोग का नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे झुलसा रोग से बचाव के लिए वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार ही उपचार करें।

ग्राहृय परीक्षण केन्द्र, तबीजी फार्म के कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि बीजीय मसाला फसलों में जीरा एक प्रमुख और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसल है। जीरे का उपयोग सब्जियों, सूप, अचार, सॉस सहित कई खाद्य पदार्थों में स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, इसकी फसल में कई प्रकार के रोग लगते हैं, जिनमें झुलसा रोग सबसे अधिक हानिकारक माना जाता है।

झुलसा रोग क्या है

डॉ. शर्मा ने बताया कि झुलसा रोग एक कवक जनित रोग है, जिसे सामान्य भाषा में काल्या रोग भी कहा जाता है। फसल में फूल आने की अवस्था के दौरान यदि मौसम में नमी अधिक हो और आकाश में बादल छाए रहें, तो इस रोग के प्रकोप की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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रोग के प्रमुख लक्षण

झुलसा रोग के प्रभाव से जीरे के पौधों की पत्तियों के सिरे झुकने लगते हैं। पत्तियों और तनों पर भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे यह रोग पत्तियों से बढ़कर वृन्त, तने और बीजों तक फैल जाता है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो रोग का प्रसार इतना तेज हो जाता है कि फसल को बचाना मुश्किल हो जाता है।

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झुलसा रोग से बचाव के उपाय

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, झुलसा रोग से बचाव के लिए निम्न उपाय अपनाए जाने चाहिए—
बुवाई के 30–35 दिन बाद 2 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। आवश्यकता अनुसार 15 दिन बाद दोहराएं।
रोग के लक्षण दिखाई देने पर डाईफेनोकोनाजॉल 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। दूसरा और तीसरा छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें।

वैकल्पिक रूप से

बुवाई के 35 दिन बाद 1 मिलीलीटर प्रोपीकोनाजोल प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर तीन छिड़काव करें।

छिड़काव के समय बरतें सावधानी

डॉ. शर्मा ने किसानों को सलाह दी कि फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव करते समय हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क और पूरे कपड़े पहनें, ताकि स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव न पड़े।

समय पर उपचार से होगा नुकसान कम

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि झुलसा रोग की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार से जीरे की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम पर नजर रखें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू करें।

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