Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

परमाणु ऊर्जा के उपयोग से होगा फसल सुधार

कृषि विश्वविद्यालय एवं बार्क ने किया अनुबंध का विस्तार

25 सितम्बर 2021, रायपुर । परमाणु ऊर्जा के उपयोग से होगा फसल सुधार – छत्तीसगढ़ में विभिन्न फसलों की परंपरागत किस्मों में परमाणु ऊर्जा के उपयोग द्वारा फसल प्रजातियों में सुधार तथा नवीन किस्मों के विकास हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र, मुम्बई के मध्य हुए समझौते के प्रथम चरण में आशातीत परिणाम प्राप्त हुए हैं। इन परिणामों की सफलता को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र, मुम्बई के मध्य फसल सुधार एवं विकास हेतु संयुक्त अनुसंधान के द्वितीय चरण हेतु अनुबंध किया गया। समझौता ज्ञापन पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.के. पाटील तथा बार्क की ओर से बायो साईंस समूह के निदेशक प्रो. तपन के. घंटी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी एवं वैज्ञानिक तथा प्रगतिशील कृषक उपस्थित थे। यह अनुबंध वर्ष 2021 से 2024 तक तीन वर्षों के लिए लागू होगा। अनुबंध के द्वितीय चरण में पहले चरण में किए गए अनुसंधान कार्यों को विस्तार देते हुए धान के अलावा अनाज, दलहन, तिलहन, गन्ना, सब्जियों और फूल वाली फसलों में परमाणु ऊर्जा की विभिन्न प्रविधियों के उपयोग द्वारा फसल सुधार एवं विकास का कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही प्रथम चरण में उत्परिवर्तन द्वारा विकसित नवीन किस्मों के ब्रीडर बीजों का प्रगुणन किया जाएगा तथा इन किस्मों को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए वृहद स्तर पर प्रक्षेत्र प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नॉलेज सेन्टर में आयोजित अनुबंध समारोह के दौरान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा बार्क के सहयोग से विकसित धान की म्यूटेन्ट किस्म विक्रम टी.सी.आर. पर भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी डाक टिकट का विमोचन किया गया। परियोजना समन्वयक डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि प्रथम चरण में उत्परिवर्तन प्रजनन के माध्यम से प्रदेश की 50 से अधिक धान की देशी प्रजातियों में सुधार एवं नवीन किस्मों का विकास किया गया।

प्रथम चरण की सफलता को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर और भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र, मुंबई के मध्यम अनुबंध का विस्तार आगामी तीन वर्षों के लिए किया जा रहा है। इस चरण में उत्परिवर्तन प्रजनन तथा विकिरण प्रौद्योगिकी के माध्यम से विभिन्न फसलों में किस्म सुधार एवं नवीन किस्मों के विकास के साथ ही फसल सुरक्षा प्रौद्योगिकी, मूल्यवर्धित खाद्य उत्पाद प्रौद्योगिकी पर भी अनुसंधान किए जाएंगे।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

इस दौरान दलहन फसलों – हरा, चना काला चना, अरहर, तिलहन फसलों – मूंगफली, सरसों, अलसी, तिल, कुसुम, राम तिल, नकदी फसल – गन्ना और बागवानी फसलों – हल्दी, लौकी, फूलों वाली फसलें आदि में विकिरण प्रेरित उत्परिवर्तन प्रजनन के माध्यम से सुधार किया जाएगा।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें