गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवन
04 जनवरी 2026, भोपाल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवन – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विकास के उस मार्ग पर अग्रसर है, जहाँ आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों को समान महत्व दिया जा रहा है। इसी समग्र दृष्टि के अंतर्गत भारतीय कृषि को भी एक नए युग की ओर ले जाया जा रहा है। कृषि सदियों से हमारी सभ्यता की रीढ़ रही है। आधुनिक युग में रासायनिक उर्वरकों और सिंथेटिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने खेती की लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, उसकी जलधारण क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप, हमारे भोजन की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत की समस्याओं का समाधान हमारी अपनी परंपराओं और ज्ञान प्रणाली में निहित है। इसी विचार से प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है, जो भारतीय कृषि की मूल आत्मा से जुड़ी हुई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कृषि को केवल उत्पादन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में देखा जाए। भारत की पारंपरिक कृषि व्यवस्था सह-अस्तित्व और संतुलन पर आधारित रही है, जिसमें गौमाता की भूमिका केंद्रीय रही है। गौ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और पोषण सुरक्षा का आधार रही हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि गौवंश का संरक्षण सीधे मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ा है। गोबर और गोमूत्र से भूमि को पोषण मिलता है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी पुनः जीवंत होती है। स्वस्थ मिट्टी से प्राप्त अन्न अधिक पौष्टिक, सुरक्षित और मानव शरीर के अनुकूल होता है। प्राकृतिक खेती का महत्व केवल खेत तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य और जीवन शैली से है। आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका एक बड़ा कारण रासायनिक अवशेषों से युक्त भोजन है। प्राकृतिक खेती से प्राप्त शुद्ध और विषमुक्त अन्न पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा योग और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाना इसी समग्र स्वास्थ्य दृष्टि का हिस्सा है। योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या तभी पूर्ण लाभ देती है जब भोजन भी शुद्ध और प्राकृतिक हो। प्राकृतिक खेती, स्वस्थ भोजन और योग—तीनों मिलकर स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करते हैं। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती केवल कृषि सुधार की पहल नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दृष्टि का पुनर्जागरण है। गौमाता और मिट्टी की रक्षा के अपने सांस्कृतिक दायित्व को निभाते हुए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भोजन, संतुलित जीवनशैली और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत के स्वप्न को साकार करने का सशक्त मार्ग है।
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