राज्य कृषि समाचार (State News)

गेहूं खरीद में गड़बड़ी पर लगाम: मध्य प्रदेश में बनेगा कंट्रोल कमांड सेंटर

22 मार्च 2025, भोपाल: गेहूं खरीद में गड़बड़ी पर लगाम: मध्य प्रदेश में बनेगा कंट्रोल कमांड सेंटर – मध्य प्रदेश में धान और गेहूं की खरीद, परिवहन और भंडारण में होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए अब एक नया कदम उठाया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को एकीकृत निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत एक केंद्रीय कंट्रोल कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जो पूरे प्रदेश में अनाज से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखेगा।

मंत्री ने अपर मुख्य सचिव (खाद्य) और आयुक्त (खाद्य) को साफ निर्देश दिए कि धान और चावल की मिलिंग व परिवहन के दौरान वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाए और इसकी लगातार निगरानी हो। कंट्रोल कमांड सेंटर के जरिए खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी एक क्लिक में भंडारण, परिवहन और मिलिंग की जानकारी हासिल कर सकेंगे। यह कदम पिछले दिनों उपार्जन प्रक्रिया में सामने आई शिकायतों के बाद उठाया जा रहा है।

गोविंद सिंह राजपूत ने विधानसभा में कहा था कि उपार्जन, परिवहन और भंडारण में गड़बड़ियों को रोकने के लिए एकीकृत सिस्टम बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि सहकारिता विभाग के साथ मिलकर ऐसी समितियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो गड़बड़ी में शामिल हैं। साथ ही, जिलों में कम्प्यूटर ऑपरेटरों द्वारा की गई गड़बड़ियों पर भी कड़ा एक्शन लेने की बात कही गई।

खरीफ उपार्जन वर्ष 2024-25 के तहत धान की मिलिंग का काम चल रहा है। इस दौरान चावल की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। मंत्री ने 11 फरवरी 2025 को नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक को निर्देश दिए थे कि मिलिंग के बाद चावल की गुणवत्ता की रैंडम जांच हो। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर एक विशेष टीम बनाई जाए।

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सदस्यीय जांच टीम तैयार

इसके जवाब में नागरिक आपूर्ति निगम ने एक 3 सदस्यीय दल गठित किया है, जिसमें सहायक महाप्रबंधक (परिदान), सहायक महाप्रबंधक (गुणवत्ता नियंत्रण) और मुख्यालय का गुणवत्ता नियंत्रक शामिल हैं। यह टीम जिलों में अचानक जांच करेगी और किसी भी अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश करेगी। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत सूचना दी जाएगी।

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हालांकि, यह नया सिस्टम कितना कारगर होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। पिछले सालों में भी ऐसी योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन मैदानी स्तर पर गड़बड़ियां रुक नहीं पाईं। अब जीपीएस और कंट्रोल सेंटर जैसे तकनीकी कदमों से निगरानी सख्त करने की कोशिश हो रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कागजी योजना बनकर रह जाएगी या वाकई जमीन पर बदलाव लाएगी?

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