राज्य कृषि समाचार (State News)

धान कटाई की पूरी तैयारी: विदिशा में किसानों को मिलेंगे स्मार्ट कृषि यंत्र, घटेगी मजदूरी

07 अक्टूबर 2025, विदिशा: धान कटाई की पूरी तैयारी: विदिशा में किसानों को मिलेंगे स्मार्ट कृषि यंत्र, घटेगी मजदूरी – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में धान कटाई कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। विभाग के उप संचालक के.एस. खपेडिया ने बताया कि जिले में धान कटाई हेतु आवश्यक यंत्रों की पूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
धान की कुल बुवाई क्षेत्रफल (रकबा) 92,028 हेक्टेयर है, जिसके लिए कुल 520 यंत्रों की आवश्यकता है। इनमें से अब तक 256 यंत्र उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जबकि शेष 94 यंत्रों की पूर्ति शीघ्र की जाएगी।

कृषि विभाग के अनुसार, विभिन्न माध्यमों से कटाई कार्य के लिए 24,848 रीपर, 30,369 मजदूर तथा हार्वेस्टर की आवश्यकता आंकी गई है। वर्तमान में जिले में 233 रीपर और 23 हार्वेस्टर उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से धान कटाई कार्य में तेजी लाई जा रही है।

नरवाई प्रबंधन के लिए भी की जा रही तैयारी

धान कटाई के साथ-साथ जिले में नरवाई प्रबंधन के लिए भी कृषि विभाग ने पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। विभाग के अनुसार, किसानों द्वारा डीबीटी पोर्टल पर अब तक 110 सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर, 29 मल्चर एवं श्रेडर, 131 रोटावेटर/रोटो कल्टीवेटर, 5 बेलर और 60 जीरो-टिल सीड ड्रिल के पंजीयन किए जा चुके हैं।

इसके अलावा, कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए स्मार्ट सीडर और हैप्पी सीडर को अनिवार्य किया गया है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों को भी मशीनों की सुविधा मिल सके। साथ ही एसआरएलएम (State Rural Livelihood Mission) के समन्वय से स्वयं सहायता समूहों को यंत्र क्रय हेतु प्रेरित किया जा रहा है।

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एफपीओ और जे-फार्म एप से होगी निगरानी

कृषि विभाग ने बताया कि जिले के 48 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को भी आधुनिक कृषि यंत्रों के क्रय के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं जे-फार्म एप पर पंजीकृत यंत्रों के माध्यम से नरवाई प्रबंधन में गेप की पूर्ति की जाएगी, जिससे खेतों में अवशेष जलाने की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सके।

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इन तैयारियों के साथ, विदिशा जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने इस बार धान कटाई को लेकर एक सशक्त रोडमैप तैयार किया है। इससे किसानों की मजदूरी लागत घटेगी, उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी और खेतों में सस्टेनेबल खेती को बढ़ावा मिलेगा।

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