राज्य कृषि समाचार (State News)

छिंदवाड़ा: आधुनिक उद्यानिकी से बदली युवा कृषक श्री संदीप पवार की तस्वीर

07 जुलाई 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा: आधुनिक उद्यानिकी से बदली युवा कृषक श्री संदीप पवार की तस्वीर –  कृषक कल्याण वर्ष 2026 की अवधारणा को साकार करते हुए छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड परासिया के ग्राम उमरेठ के युवा प्रगतिशील कृषक श्री संदीप पवार ने यह सिद्ध कर दिया है, कि यदि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और शासन की योजनाओं का समुचित उपयोग किया जाए तो खेती को अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। आज वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।

योजना से पहले की स्थिति – कृषक श्री संदीप पवार के पास कुल 6.504 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें सिंचाई के लिए नलकूप की सुविधा उपलब्ध थी। वे पहले परंपरागत पद्धति से खेती करते थे, जिससे उत्पादन और आय सीमित थी तथा पानी का उपयोग भी अपेक्षाकृत अधिक होता था।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना बनी बदलाव का आधार – वर्ष 2011-12 में कृषक श्री संदीप पवार ने उद्यानिकी विभाग की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 70 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने आधुनिक सिंचाई तकनीक, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक एवं वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को अपनाया। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पानी की बचत हुई, पौधों को आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं पोषक तत्व मिलने लगे, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि
हुई।

उद्यानिकी फसलों से रिकॉर्ड उत्पादन – इस वर्ष कृषक श्री संदीप ने अपनी कृषि भूमि पर उद्यानिकी फसलों का सफल मॉडल विकसित किया है। उन्होंने 4 एकड़ में हरी मिर्च, 2.5 एकड़ में करेला और 5 एकड़ में शिमला मिर्च की फसल लगाई। जिससे उन्हें हरी मिर्च – 4 एकड़ में खेती से 20 टन उत्पादन, करेला – 2.5 एकड़ में खेती से 25 टन उत्पादन और शिमला मिर्च – 5 एकड़ में खेती से 100 टन उत्पादन प्राप्त हुआ है। इन तीनों फसलों पर लगभग 11.50 लाख रुपये की लागत आई।

उद्यानिकी फसलों के उत्पादन से हुई लाखों की आय – उत्पादित फसलों का विपणन स्थानीय बाजारों एवं व्यापारियों के माध्यम से किया गया। हरी मिर्च का विक्रय (20 टन) ₹30 प्रति किलोग्राम की दर से करने पर 6 लाख रुपये, करेले का विक्रय (25 टन) ₹15 प्रति किलोग्राम की दर से करने पर 3.75 लाख रुपये और शिमला मिर्च (100 टन) का विक्रय ₹15 प्रति किलोग्राम की दर से करने पर 15 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। इस तरह तीनों फसलों से कुल 24.75 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई और उत्पादन लागत निकालने के बाद 13.25 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित हुई है।

आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में आया सकारात्मक बदलाव – उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ मिलने के बाद श्री संदीप पवार के जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन आए। उन्होंने खेती से हुई आय से पक्के मकान का निर्माण कराया, नए आधुनिक कृषि यंत्र खरीदे और उनका  उपयोग बढ़ाया। परिवार की शिक्षा एवं सामाजिक आवश्यकताएं अब बेहतर ढंग से पूरी हो रही हैं । उन्होंने चार पहिया वाहन (स्कॉर्पियो) भी खरीद लिया है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने से  उन्हें समाज में एक नई पहचान और सम्मान मिला है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा – कृषक श्री संदीप पवार का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज एवं वैज्ञानिक खेती को अपनाएं तथा उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ लें, तो कम पानी में अधिक उत्पादन एवं बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। वे बताते हैं कि पहले परंपरागत खेती से सीमित लाभ मिलता था, लेकिन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई अपनाने के बाद उत्पादन, गुणवत्ता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज उनकी खेती पूरी तरह आधुनिक तकनीकों पर आधारित है और वे आसपास के किसानों को भी उन्नत उद्यानिकी खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

कृषक श्री पवार का संदेश – “मैं सभी किसानों से आग्रह करता हूँ कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें, आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाएं तथा उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती करें। इससे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आधुनिक खेती ही आत्मनिर्भर एवं समृद्ध किसान की पहचान है।”

  श्री संदीप पवार जैसे युवा प्रगतिशील कृषकों की सफलता इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के लक्ष्य को साकार करने में आधुनिक उद्यानिकी, सूक्ष्म सिंचाई तकनीक, वैज्ञानिक खेती एवं शासन की योजनाओं का समन्वय किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन रही हैं। तकनीक और नवाचार के साथ खेती को पूरी तरह लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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