छत्तीसगढ़: IGKV रायपुर को मिला बेस्ट सोयाबीन रिसर्च सेंटर का राष्ट्रीय अवॉर्ड, हैदराबाद में टीम सम्मानित
15 अप्रैल 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़: IGKV रायपुर को मिला बेस्ट सोयाबीन रिसर्च सेंटर का राष्ट्रीय अवॉर्ड, हैदराबाद में टीम सम्मानित – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर के अंतर्गत संचालित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन) को वर्ष 2023-2025 की मूल्यांकन अवधि के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर परियोजना के तहत प्रदान किया गया, जिसे विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस उपलब्धि पर कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री ने भी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
यह पुरस्कार 09 अप्रैल 2026 को हैदराबाद स्थित प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 56वीं वार्षिक समूह बैठक के दौरान प्रदान किया गया। इस मौके पर देश के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और कृषि संस्थानों के प्रमुख उपस्थित रहे। रायपुर केंद्र की टीम को सोयाबीन अनुसंधान में लगातार उत्कृष्ट कार्य के लिए यह सम्मान मिला।
क्यों मिला यह राष्ट्रीय सम्मान
यह पुरस्कार अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सोयाबीन) नेटवर्क के अंतर्गत दिया गया। रायपुर केंद्र ने अनुसंधान परीक्षण, वैज्ञानिक प्रकाशन, प्रजनन नवाचार, तकनीक विकास, किसान संपर्क कार्यक्रम और बीज उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
केंद्र ने लगातार तीन वर्षों तक सभी निर्धारित शोध परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए और उनकी स्वीकृति भी प्राप्त की। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र, छात्रों के मार्गदर्शन और वैज्ञानिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।
प्रमुख उपलब्धियां और नवाचार
रायपुर केंद्र ने सोयाबीन अनुसंधान में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। इसमें मजबूत जर्मप्लाज्म प्रबंधन, व्यापक संकरण कार्यक्रम और नई उन्नत किस्मों का विकास शामिल है। केंद्र ने पूर्वी क्षेत्र के लिए तीन उन्नत सोयाबीन किस्में विकसित की हैं।
इसके अलावा, छह उत्पादन और संरक्षण तकनीकें विकसित की गई हैं और तीन जर्मप्लाज्म लाइनों का पंजीकरण भी किया गया है। वैज्ञानिकों ने उच्च उपज और रोग प्रतिरोधी किस्मों पर भी महत्वपूर्ण काम किया है।
किसानों तक तकनीक पहुंचाने में बड़ी भूमिका
IGKV रायपुर ने केवल शोध ही नहीं, बल्कि किसानों तक तकनीक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई है। केंद्र द्वारा हर साल लगभग 100 फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन किए जाते हैं। साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में किसानों को प्रशिक्षण और प्रदर्शन के जरिए नई तकनीकों की जानकारी दी जाती है।
बीज उत्पादन और न्यूक्लियस बीज उत्पादन में भी केंद्र ने लगभग लक्ष्य के करीब प्रदर्शन किया है, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध हो रहा है।
टीम को मिला सम्मान
इस उपलब्धि के लिए परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों और टीम सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही कुछ वैज्ञानिकों को व्यक्तिगत स्तर पर भी राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। केंद्र का लक्ष्य आगे भी सोयाबीन उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए नवाचार करना है।
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