देपालपुर क्षेत्र में चने का रकबा घटा

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(शैलेष ठाकुर, देपालपुर)। गत कुछ वर्षों से बारिश की कमी के चलते क्षेत्र के किसान डॉलर चना बो रहे थे, लेकिन चने में उकटा और सूखा रोग लगने से उत्पादन में कमी आने और कीमत कम मिलने के साथ ही इस वर्ष बारिश अच्छी होने से किसानों का रुझान गेहूं बोने पर ज्यादा रहा। यहां तक की जहां भू जल स्तर कम था, वहां भी गेहूं लगाया, ताकि फसल परिवर्तन हो जाए। इसलिए देपालपुर क्षेत्र में चने का रकबा घट गया। यह निष्कर्ष क्षेत्र के किसानों से हुई चर्चा में सामने आया।
सुनाला के किसान श्री राजेश सेठ ने बताया कि इस साल चार बीघा में चना बोया है, जबकि गत वर्ष इतने रकबे में केवल गेहूं बोया था। पानी की कमी के कारण चना बो रहे थे। सूखने की बीमारी के चलते चने का उत्पादन कम हुआ। इस साल बारिश अच्छी होने से गेहूं ज्यादा बोया। चना नवंबर के आखिर में लगाया ताकि शुरूआती ठंड से बचा जा सके। जबकि गोकुलपुर के श्री चरणसिंह जाट ने इस साल चना नहीं बोया। जश्री जाट का मानना है कि इस साल गेहूं का बम्पर उत्पादन होगा। उन्होंने कृषक जगत के माध्यम से सरकार से निवेदन किया कि किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी न हो इसकी समुचित व्यवस्था के लिए अभी से योजना बनाएं। ग्राम बोरिया के श्री राहुल मकवाना ने सिर्फ दो तीन सीडड्रिल चना लगाया है। उनका कहना था कि जब पर्याप्त पानी है तो जोखिम क्यों लें। उधर, उप संचालक (कृषि) किसान कल्याण तथा कृषि विकास इंदौर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर जिले में 75 हजार हेक्टर लक्ष्य के विरुद्ध 65,200 हेक्टर में चने की बोवनी हुई। जबकि गत वर्ष 86 ,453 हे. में चने की बोवनी हुई थी। इस वर्ष बारिश अधिक होने से भू जल स्तर बढऩे से गेहूं का रकबा बढ़ा है। इसके विपरीत बिरगोदा के श्री करतारसिंह सिसोदिया ने जहां हर साल गेहूं बोते थे उस खेत के 25 प्रतिशत जमीन में फसल परिवर्तन के लिए चना बोया है। दूसरा कारण यह कि इस साल चने के बीज का भाव भी कम था और अन्य किसानों ने भी चना कम बोया इसलिए भाव अच्छे रहने की उम्मीद में 25 नवंबर को चना बोया ताकि शुरूआती पाले से बचा जा सके। उधर,श्री अंतरसिंह ठाकुर ने छोटा चना देरी से लगाया है, ताकि अत्यधिक ठंड से चना बच सके। इस प्रतिनिधि ने भी पाले के भय से 25 अक्टूबर को ही ढाई बीघा में चना बो दिया था, ताकि यदि कोई नुकसान हो तो दूसरी फसल ली जा सके। फूल और घेटे में कुछ नुकसान हुआ है।

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