राजस्थान में खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम, 5 और जिलों में लागू हुआ डिजिटल वितरण सिस्टम
25 अगस्त 2026, जयपुर: राजस्थान में खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम, 5 और जिलों में लागू हुआ डिजिटल वितरण सिस्टम – राजस्थान में किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार समय पर और आसानी से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने के लिए डिजिटल तकनीक आधारित इस व्यवस्था को अब 5 और जिलों में लागू किया गया है। इससे उर्वरक की मांग, उपलब्धता और वितरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने सोमवार को पंत कृषि भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्था की प्रगति और आगामी चरण की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने जिलावार उर्वरक की मांग, उपलब्ध स्टॉक और डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी ली।
5 जिलों में लागू हुई नई व्यवस्था
कृषि आयुक्त ने बताया कि सिरोही और राजसमंद में इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। इन दोनों जिलों में अब तक 78 हजार से अधिक किसानों को 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक वितरित किया गया है। 25 जून से शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के दौरान उर्वरक की मांग से लेकर उपलब्धता और वितरण तक की निगरानी की गई। इससे वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाने में मदद मिली और कालाबाजारी, अनावश्यक जमाखोरी, कृत्रिम कमी तथा अनियमित वितरण पर नियंत्रण मजबूत हुआ। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद 25 अगस्त से बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके अलावा 12 अन्य जिलों में जल्द व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
घर बैठे कर सकेंगे खाद की बुकिंग
नई व्यवस्था में किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद किसान को 48 घंटे की वैधता वाला टोकन जारी किया जाएगा। किसान इस टोकन के आधार पर अपने नजदीकी अधिकृत उर्वरक विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेंगे। यदि किसान 48 घंटे के भीतर उर्वरक नहीं लेता है तो उसे दोबारा बुकिंग करनी होगी। इससे वास्तविक जरूरत वाले किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और खाद वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।
खाद के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के तहत किसान को बुकिंग के बाद नजदीकी अधिकृत विक्रेता से खाद उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक जाने और लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी कम होगी। किसान को यह भी पता रहेगा कि उसे उर्वरक कहां और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा।
मांग और स्टॉक की डिजिटल निगरानी
डिजिटल व्यवस्था के जरिए उर्वरक की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। मांग, आपूर्ति और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने, अनावश्यक खरीद पर अंकुश लगाने और जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी। कृषि विभाग के अनुसार सिरोही और राजसमंद में इस व्यवस्था को लागू करने पर 175 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है। वहीं पूरे प्रदेश में व्यवस्था लागू होने पर 675 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की उम्मीद है।
खाद की होम डिलीवरी पर भी काम
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि कृषि विभाग एलपीजी गैस की तर्ज पर किसानों को उर्वरक की होम डिलीवरी उपलब्ध कराने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रहा है। इस संबंध में सहकारिता विभाग के साथ प्रारंभिक चरण की बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के व्यापक विस्तार से किसानों को वास्तविक मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ कालाबाजारी और जमाखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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