भारत कृषक समाज ने मज़बूती से रखा किसानों का पक्ष
26 फरवरी 2026, जबलपुर: भारत कृषक समाज ने मज़बूती से रखा किसानों का पक्ष – किसानों की ओर से किसानों के गैर राजनीतिक, वर्ग विहीन, राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज महाकौशल म.प्र. के अध्यक्ष इंजी.श्री के के अग्रवाल ने विद्युत नियामक आयोग की ऑनलाइन जनसुनवाई में 11 बिंदुओं की आपत्ति पर विस्तार से किसानों का पक्ष रखा।
जन सुनवाई में आयोग से कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्र में सुचारु विद्युत प्रदाय व्यवस्था का अभाव है। मैदानी अधिकारियों की उदासीनता व लापरवाही के चलते ग्रामीण जन अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। , ट्रांसफार्मर, खम्भे, लाइन की हालत बद से बदतर है। वोल्टेज,ट्रिपिंग की समस्या व समय पर सुधार कार्य न होने से किसान बिजली का समुचित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं । कृषि पम्पों के लिए सरकार के 10 घंटे के वायदे के इतर उन्हें अभी भी 5 – 6 घंटे ही बिजली मिल पा रही है,। कृषि पम्पों के हार्स पावर बढ़ा कर विद्युत बिलो में अचानक अप्रत्याशित वृद्धि , चोरी के फर्जी प्रकरण बनाये जाने, तथा उन्हें नाना प्रकार से प्रताड़ित व धमकाए जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। विडंबना है कि नियामक आयोग ने इन शिकायतों को कभी संज्ञान में नहीं लिया, न ही कोई जांच की और न ही विद्युत कम्पनी पर कभी कोई कार्यवाही कर कोई दिशा निर्देश जारी किये। नियामक आयोग अपने दायित्वों के निर्वहन मे पीछे क्यों रहा, यह समझ के परे है। ग्रामीण जन दोयम दर्जे का जीवन जीने मजबूर हैं । विद्युत प्रदाय में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में भेदभाव विद्युत चार्टर का खुला उल्लंघन है।
आयोग से आग्रह किया गया कि वे मैदानी क्षेत्र में विद्युत प्रदाय की स्थिति का आकलन करने वरिष्ठ अधिकारियों को एक सप्ताह गांव में रहने का आदेश जारी करें, जिससे दूध का दूध पानी का पानी स्पष्ट हो सके। ऐसे में विद्युत लॉस व कम्पनी द्वारा किये जा रहे अपव्यय के भार का ठीकरा उपभोक्ताओं पर थोपना कदापि न्यायोचित नहीं होगा। श्री अग्रवाल ने अन्य प्रांतों का हवाला देते हुए बताया कि जब देश के कई प्रांतों में बिजली की दरें मध्यप्रदेश से कम हैं , और वहां किसानों को दिन में उच्च गुणवत्ता की पर्याप्त बिजली दी जा सकती है, तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं ? जबकि यहां सरप्लस में बिजली उपलब्ध है।
आयोग के समक्ष किसानों की समस्याओं का प्रमाण सहित जोरदार व विस्तार से प्रस्तुतीकरण कर आग्रह किया गया कि जब तक ग्रामीण क्षेत्र में आवश्यकतानुसार, गुणवत्ता की बिजली प्रदाय तथा व्यवस्था में सुधार व उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक विद्युत कम्पनी के दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार न किया जाए तथा इसे सिरे से ख़ारिज किया जाए। आयोग के समक्ष किसान सेवा संगठन की ओर से श्री जितेंद्र देसी द्वारा भी किसानों का पक्ष रखते हुए कहा गया कि ग्रामीण भारत को प्राथमिकता दिये बिना देश समृद्ध नहीं होगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मैदानी कर्मचारी व संसाधन बढ़ाने की मांग की गई I
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