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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 का उद्घाटन: किसानों के बकाया भुगतान पर 12% ब्याज, शिवराज सिंह चौहान ने कृषि सुधारों का रोडमैप रखा

26 फरवरी 2026, नई दिल्ली: पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 का उद्घाटन: किसानों के बकाया भुगतान पर 12% ब्याज, शिवराज सिंह चौहान ने कृषि सुधारों का रोडमैप रखा – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भुगतान प्रणाली, संस्थागत जवाबदेही, लाइसेंस प्रक्रिया और सब्सिडी वितरण से जुड़े कृषि सुधारों का रोडमैप प्रस्तुत किया।

आईसीएआर–आईएआरआई परिसर में आयोजित इस वार्षिक मेले में वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, कृषि उद्यमियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पौधारोपण से हुआ। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव सहित कई अधिकारी और किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

समयबद्ध भुगतान और वित्तीय जवाबदेही

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि कोई एजेंसी या राज्य सरकार किसानों का भुगतान रोकती है, तो उसे बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भुगतान में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से देरी नहीं करेगी और आवश्यकता पड़ने पर केंद्र का हिस्सा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने के विकल्प पर कार्य किया जा रहा है।

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उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 75 प्रतिशत छोटे किसान प्रभावी 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर रहे हैं। ऋण वितरण में देरी स्वीकार्य नहीं है और बैंकों को समयबद्ध तथा सरल प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी, ताकि किसान अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर न रहें।

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योजनाओं की निगरानी, केवीके की भूमिका और लाइसेंस सुधार

कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पालीहाउस और ग्रीनहाउस जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार 18 से अधिक योजनाओं के तहत राज्यों को संसाधन उपलब्ध कराती है। हालांकि, केवल धन जारी करना पर्याप्त नहीं है; यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि लाभ वास्तविक किसानों तक पहुँचे। एक जिले का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सूची में 700 किसानों के नाम होने के बावजूद केवल 158 किसानों को मशीनें मिलीं। निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों को शोध और विस्तार के बीच प्रभावी सेतु के रूप में विकसित किया जाएगा। केवीके राज्यों के साथ समन्वय कर नई किस्में, उन्नत तकनीक और सफल कृषि मॉडल गांव स्तर तक पहुँचाने का कार्य करेंगे।

कीटनाशक लाइसेंसिंग प्रणाली को लंबी और जटिल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद शीघ्र बाजार में पहुँच सकें और नकली या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों पर नियंत्रण मजबूत हो।

एमएसपी, सब्सिडी और ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की वर्तमान तीन महीने की समय-सीमा को अव्यावहारिक बताते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों के पास लंबे समय तक भंडारण की क्षमता नहीं होती। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों के साथ मिलकर अधिकतम एक महीने में खरीद प्रक्रिया पूरी करने की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसानों को शीघ्र भुगतान मिल सके।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार खाद सब्सिडी पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करती है। इस पर विचार किया जाना चाहिए कि सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से दी जाए, ताकि किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक का चयन कर सकें।

शिवराज सिंह चौहान ने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि अप्रैल से खरीफ सीजन से पहले वैज्ञानिकों की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगी। इसमें रोग-कीट प्रबंधन, एकीकृत खेती मॉडल, उन्नत बीज और निर्यात गुणवत्ता उत्पादन पर जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने पूसा कृषि विज्ञान मेले को राष्ट्रीय मंच बताते हुए कहा कि यह आयोजन प्रयोगशाला की शोध को खेतों तक पहुँचाने का माध्यम है और अगले वर्ष इसे और व्यापक स्वरूप में आयोजित करने के निर्देश दिए।

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