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राज्य कृषि समाचार (State News)

काला नमक धान की प्राकृतिक खेती से बांदा का किसान बना लखपति

04 सितंबर 2026, बांदा: काला नमक धान की प्राकृतिक खेती से बांदा का किसान बना लखपति – बुंदेलखंड की सूखा-प्रभावित धरती पर भी अच्छी कमाई हो सकती है, यह साबित कर दिखाया है बांदा जिले के खेरवा गांव के किसान विज्ञान शुक्ला ने। पिछले 20 वर्षों से बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के खेती कर रहे शुक्ला अब काला नमक धान की प्राकृतिक खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं।

पिछले साल उन्होंने 20 एकड़ में काला नमक धान बोया था, लेकिन बेहतर उत्पादन और अच्छे बाजार भाव को देखते हुए इस साल उन्होंने रकबा बढ़ाकर 100 एकड़ कर दिया। उन्हें प्रति एकड़ 15 से 16 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है।

काला नमक चावल अपनी खुशबू, स्वाद व पोषण गुणों के कारण बाजार में 150 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इस हिसाब से एक एकड़ की उपज से करीब 1.5 लाख रुपये तक की आय हो सकती है।

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60 किसानों को मुफ्त बीज देकर बढ़ाया रकबा

शुक्ला सिर्फ खुद खेती नहीं कर रहे, बल्कि आसपास के किसानों को भी जोड़ रहे हैं। उन्होंने अब तक 60 किसानों को मुफ्त बीज दिए हैं, जिससे इलाके में काला नमक धान का रकबा लगातार बढ़ रहा है।

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उनका कहना है कि काला नमक धान का पौधा मजबूत होता है, इसलिए फसल गिरने का खतरा कम रहता है, कटाई पर खर्च कम आता है और बाजार में लगातार बढ़ती मांग से किसानों को अच्छा दाम मिल जाता है। काला नमक के अलावा शुक्ला 25 एकड़ में महा-चिन्नौर धान की भी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

उनका अनुभव है कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, खेती की लागत घटती है और लंबे समय तक टिकाऊ उत्पादन मिलता रहता है।

बुंदेलखंड के किसानों के लिए क्यों है यह मिसाल

बुंदेलखंड का इलाका सिंचाई की कमी और अनिश्चित मानसून के लिए जाना जाता है। ऐसे में जब कोई किसान बिना महंगे रासायनिक इनपुट के, कम पानी में भी टिकने वाली परंपरागत किस्म से लाखों की आमदनी कमाता है, तो वह क्षेत्र के दूसरे छोटे और सीमांत किसानों के लिए व्यावहारिक रास्ता दिखाता है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि विशिष्ट (स्पेशियलिटी) धान किस्मों की बढ़ती मांग और प्रीमियम कीमत, कम भूमि वाले किसानों के लिए भी आय बढ़ाने का एक भरोसेमंद विकल्प बन सकती है।

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