ग्रोप्लस से केला बना आकर्षक

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12 जुलाई 2022, धार । ग्रोप्लस से केला बना आकर्षक – ‘समय परिवर्तनशील है’ पहले एक-दूसरे की खेती देखकर तकनीक अपनाई जाती है। इसका परिणाम यह हुआ कि रसायनों का अंधाधुंध उपयोग से जमीन की सेहत खराब हो गई। आधुनिक युग में कृषि की ऐसी तकनीकों का विस्तार हुआ कि जहां एक बोरी की जगह एक चम्मच में काम होने लगा ऐसा मानना है ग्राम हतनारा, तहसील धरमपुरी के कृषक श्री यशपाल सोलंकी का इन्होंने सर्वप्रथम अपने खेत का मिट्टी परीक्षण कराया। फिर खेतों में उतने ही उवर्रक डाले जिनकी आवश्यकता थी।

श्री सोलंकी बताते हैं कि केला फसल में डीएपी की जगह प्रति बीघा कोरोमंडल ग्रोप्लस की 4 बोरी, पोटाश की 1 बोरी एवं 1 बोरी यूरिया का उपयोग किया इसके आश्चर्यजनक परिणाम मिले। केला आकर्षक, वजनदार, लंबा हुआ बाजार में इसके उच्चतम दाम मिले। आसपास के कृषकों ने भी फसल देखकर तकनीक समझी। आपने उन कृषकों को बताया हर साल डीएपी डालते थे किन्तु जब से ग्रोप्लस डालना प्रारंभ किया है तब से डीएपी खरीदना बंद कर दिया है। ग्रोप्लस में पांच तत्वों की पूर्ति होती है जिससे फसल भरपूर पैदा होती है।

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