बालाघाट: जलभराव वाले खेत में उगा रहे सिंघाड़ा, युवा किसान युवराज पारधी ने खोजा खेती का नया विकल्प
09 अक्टूबर 2026, बालाघाट: बालाघाट: जलभराव वाले खेत में उगा रहे सिंघाड़ा, युवा किसान युवराज पारधी ने खोजा खेती का नया विकल्प – खेत में उपलब्ध पानी को केवल एक संसाधन के रूप में देखने के बजाय उसका बेहतर उपयोग करते हुए बालाघाट जिले के किरनापुर विकासखंड के ग्राम कांद्रिकला (गन्नाटोला) के युवा कृषक युवराज पारधी ने सिंघाड़े की खेती को अपनाया है। उन्होंने करीब 50 डिसमिल रकबे में सिंघाड़े की फसल लगाकर कृषि में फसल विविधीकरण की दिशा में एक नई पहल की है।सामान्यतः जिन खेतों में पर्याप्त जलभराव या पानी की उपलब्धता रहती है, वहां पारंपरिक फसलों की खेती करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है।
ऐसे में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और खेत की परिस्थितियों के अनुरूप फसल का चयन किसानों के लिए आय के नए अवसर खोल सकता है। इसी सोच के साथ युवराज पारधी ने सिंघाड़े की खेती को अपने कृषि कार्य का हिस्सा बनाया है।युवराज के खेत में उपलब्ध जल संसाधन को ध्यान में रखते हुए सिंघाड़े की खेती का चयन किया गया। सिंघाड़ा पानी वाले क्षेत्रों में उत्पादित होने वाली महत्वपूर्ण फसल है।
किसान ने खेत की स्थानीय परिस्थितियों को समस्या मानने के बजाय उसे कृषि के नए अवसर में बदलने का प्रयास किया है। सिंघाड़े की खेती के माध्यम से एक ओर जहां उपलब्ध जल संसाधन का उपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान को पारंपरिक फसलों के अतिरिक्त एक वैकल्पिक कृषि गतिविधि का अवसर मिला है। यह पहल क्षेत्र के उन किसानों के लिए भी उपयोगी उदाहरण बन सकती है, जिनके खेतों में पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है।
कृषि अधिकारियों ने खेत का किया निरीक्षण
कृषक युवराज पारधी के सिंघाड़ा उत्पादन क्षेत्र का कृषि विकास अधिकारी विजय सिंह अहाके एवं कृषि विस्तार अधिकारी गांधी घोरमारे सेवती ने निरीक्षण किया। अधिकारियों ने खेत में सिंघाड़े की फसल की स्थिति, उपलब्ध जल व्यवस्था और उत्पादन की प्रगति का अवलोकन किया।कृषि विस्तार अधिकारी गांधी घोरमारे ने कहा कि किसानों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए फसल विविधीकरण को अपनाना चाहिए। जलयुक्त क्षेत्रों में सिंघाड़े जैसी फसलों की खेती उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकती है।
कृषक युवराज पारधी द्वारा सिंघाड़े की खेती अपनाना किरनापुर क्षेत्र में फसल विविधीकरण और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। खेत की परिस्थितियों के अनुरूप फसल का चयन कर किसान कृषि में नए विकल्प तलाश सकते हैं। युवराज की यह पहल अन्य किसानों को भी अपने खेत की प्रकृति, उपलब्ध पानी और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का आकलन कर वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
कृषक युवराज पारधी के सिंघाड़ा उत्पादन क्षेत्र का कृषि विकास अधिकारी विजय सिंह अहाके एवं कृषि विस्तार अधिकारी गांधी घोरमारे सेवती ने निरीक्षण किया। अधिकारियों ने खेत में सिंघाड़े की फसल की स्थिति, उपलब्ध जल व्यवस्था और उत्पादन की प्रगति का अवलोकन किया।कृषि विस्तार अधिकारी गांधी घोरमारे ने कहा कि किसानों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए फसल विविधीकरण को अपनाना चाहिए।
जलयुक्त क्षेत्रों में सिंघाड़े जैसी फसलों की खेती उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकती है। कृषक युवराज पारधी द्वारा सिंघाड़े की खेती अपनाना किरनापुर क्षेत्र में फसल विविधीकरण और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। खेत की परिस्थितियों के अनुरूप फसल का चयन कर किसान कृषि में नए विकल्प तलाश सकते हैं। युवराज की यह पहल अन्य किसानों को भी अपने खेत की प्रकृति, उपलब्ध पानी और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का आकलन कर वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
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