इंदौर कृषि महाविद्यालय की ज़मीन फिर हथियाने की कोशिश

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कृषि विश्वविद्यालय बनाने का सपना रह जाएगा अधूरा

20 जुलाई 2022, इंदौर । इंदौर कृषि महाविद्यालय की ज़मीन फिर हथियाने की कोशिश – करीब एक सदी पुरानी  कृषि अनुसन्धान की ज़मीन पर  शहर सघन वन विकसित करने के नाम पर इंदौर कृषि महाविद्यालय की भूमि हथियाने की कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है। गत दिनों जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता से महाविद्यालयीन गतिविधियों एवं अनुसन्धान कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन की इस कार्रवाई का कृषि के वर्तमान एवं पूर्व छात्रों के संगठन के अलावा किसान संगठनों द्वारा भी विरोध किया जा रहा है।

इंदौर के कृषि महाविद्यालय की ज़मीन को जबरन लेने की कोशिश पहले भी दो बार हो चुकी है। पहले मेट्रो प्रोजेक्ट और उसके बाद जिला अदालत के नए भवन के लिए भी यह ज़मीन लेने के प्रयास किए गए थे, जिसका राजमाता विजया राजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय , ग्वालियर , महाविद्यालय प्रबंधन , विद्यार्थियों के संगठन और भारतीय किसान संघ ने संयुक्त रूप से विरोध किया, तो फिर यह मामला ठंडा पड़ गया था। यही नहीं तब यह ज़मीन लेने के मामले में पद्मश्री स्वर्गीय कुट्टी मेनन ,पद्मश्री श्री भालू मोढ़े और किसान नेता श्री शिव कुमार कक्काजी ने भी विरोध दर्ज़ कराया था। यहां इस बात का उल्लेख प्रासंगिक है कि  एल्युमनी एसोसिएशन, एग्री अंकुरण संस्था एवं किसान संगठन लम्बे अर्से  से इंदौर कृषि महाविद्यालय को कृषि विश्व विद्यालय बनाने की मांग कर रहे हैं। जिस पर कृषि मंत्री श्री कमल  पटेल ने सहमति देते हुए आश्वस्त कर कहा था कि इंदौर कृषि महाविद्यालय को कृषि विश्व विद्यालय बनाया जाएगा, इस प्रस्तावित कृषि विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र संपूर्ण मालवा एवं निमाड़ क्षेत्र रहेगा। नया कृषि विश्वविद्यालय आने से इस क्षेत्र में एग्रीकल्चर की नई रिसर्च का रास्ता खुलेगा एवं बहुत सारे रिसर्च स्कॉलर निकलेंगे। श्री पटेल ने तो  इंदौर में बनने वाले कृषि विश्वविद्यालय का नामकरण  श्री अटल बिहारी वाजपेयी कृषि विश्वविद्यालय भी कर दिया था।  लेकिन इसके विपरीत अब इस महाविद्यालय की ज़मीन फिर से हथियाने की कोशिश शुरू हो गई है। ऐसे में जहाँ इंदौर कृषि महाविद्यालय को कृषि विश्वविद्यालय बनाने का सपना अधूरा रह जाएगा, वहीं कृषि मंत्री की घोषणा का मज़ाक भी उड़ेगा। इसके विरोध में स्वर बुलंद होने लगे हैं। कृषि से संबद्ध छात्रों द्वारा संभागायुक्त को ज्ञापन देने के बाद अब विरोधस्वरूप किसानों और जागरूक नागरिकों की ओर से भी जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे जाने की तैयारी है।  

इंदौर कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ शरद चौधरी ने कृषक जगत को बताया कि गत दिनों जिला प्रशासन के अधिकारियों के दल ने कृषि महाविद्यालय में की जा रही गतिविधियों की जानकारी लेकर महाविद्यालय का मुआयना किया था। बाद में महाविद्यालय ने जिला प्रशासन को सौंपे अपने प्रतिवेदन में अपना पक्ष रखते हुए करीब सौ साल पुराने,124 हेक्टर में फैले महाविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व, 550 छात्रों के शिक्षण, जारी कृषि गतिविधियों, अनुसंधान कार्यों और दीर्घावधि की परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी देकर बताया कि यहां जारी गतिविधियों से ग्रीन ज़ोन तो बनता ही है,ऑक्सीज़ोन स्वतः निर्मित होता है। तापमान भी सुधरता है और प्रदूषण की भी समस्या नहीं रहती है।

यहाँ इस बात पर गौर करना ज़रूरी है कि कृषि अनुसंधान से जुड़ी भूमि की संरचना तैयार होने में वर्षों लग जाते हैं ,ऐसे में यदि इस कृषि महाविद्यालय को अन्यत्र विस्थापित कर दिया गया, तो अनुसन्धान के कार्यों में तो बाधा आएगी ही, जो प्रयोग अभी चल रहे हैं उसके नतीजों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।अनुसंधान के कार्य पिछड़ जाएंगे। प्रस्तावित शहर सघन वन के नाम पर इस ज़मीन को लेने की कोशिश के पीछे की नीयत पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं ,क्योंकि इस बेशकीमती ज़मीन पर भू माफियाओं की पहले से नज़र है। कहीं ऐसा न हो कि जिस  प्रस्ताव को लेकर कृषि महाविद्यालय से ज़मीन ली जा रही है, बाद में वह योजना ही बदल जाए और अंततः यह ज़मीन उन्हीं लोगों के हाथों में पहुँच जाए जिसके लिए यह सब ताना बाना बुना गया है।

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