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राज्य कृषि समाचार (State News)

नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख की स्वीकृति

12 अगस्त 2026, भोपाल: नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न हुई। जिसमें कई निर्णय लिए गए।  इनमें अन्य निर्णयों के साथ किसान वर्ष में मंत्रिपरिषद की सौगात-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी एवं जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति  शामिल हैं।

मंत्रि-परिषद ने किसान वर्ष में सोयाबीन किसानों को भी सौगात दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भारत सरकार के अंतर्गत गठित उपक्रम नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए ग्राम भाऊखेड़ी तहसील इछावर जिला सीहोर में 20 हेक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICMR-NSRI) भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत निकाय है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित किया जाता है। यह संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रस्तावित भूमि का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित करने के लिये किया जाएगा। इस केंद्र की स्थापना से मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खेती में चहुँमुखी प्रगति की उम्मीद है।

इसके अलावा  मंत्रि-परिषद ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय को वेतन भत्तों मानदेय आदि के लिए ब्लॉक ग्रांट योजना के आगामी 05 वर्षो वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केन्द्र संचालित हैं, जिनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त लगभग 500 ओल्ड पेंशनरों के वेतन, भत्तों, मानदेय एवं पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों के साथ-साथ संस्थानों के आवश्यक प्रशासनिक एवं आकस्मिक व्यय की पूर्ति राज्य शासन द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से की जाती है।

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