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राज्य कृषि समाचार (State News)

एपीडा की 113वीं बैठक: सांसद दर्शन सिंह ने बासमती को GI टैग दिलाने की मांग की, FPO को निर्यातकों से जोड़ने का रखा प्रस्ताव

11 अक्टूबर 2026, भोपाल: एपीडा की 113वीं बैठक: सांसद दर्शन सिंह ने बासमती को GI टैग दिलाने की मांग की, FPO को निर्यातकों से जोड़ने का रखा प्रस्ताव – कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की 113वीं बैठक में होशंगाबाद–नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं एपीडा प्राधिकरण के सदस्य दर्शन सिंह चौधरी ने मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने से संबंधित कई प्रस्ताव रखे। उन्होंने मध्यप्रदेश की बासमती धान को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पहचान दिलाने के लिए समयबद्ध पहल करने के साथ ही किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को निर्यात की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया।

मध्यप्रदेश की बासमती को जीआई पहचान दिलाने की मांग

सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने बैठक में मध्यप्रदेश की बासमती धान को जीआई पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने संभावित बासमती उत्पादक क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने, उत्पादन क्षेत्रों का मानचित्र तैयार करने, गुणवत्ता की जांच करने और आवश्यक तकनीकी दस्तावेज तैयार करने का सुझाव दिया। साथ ही, जीआई पहचान की प्रक्रिया के लिए जरूरी कानूनी और तकनीकी कार्रवाई शुरू करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि बासमती को जीआई पहचान दिलाने की प्रक्रिया के साथ ही उत्पादक किसानों को गुणवत्ता जांच, उपज की पहचान और उसकी निगरानी की व्यवस्था, पैकेजिंग, निर्यातकों से संपर्क तथा प्रायोगिक निर्यात से भी जोड़ा जाना चाहिए, ताकि किसानों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिल सके।

मूंग, चावल और दलहन के निर्यात की कार्ययोजना बनाने का सुझाव

सांसद ने नर्मदापुरम में पहले आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के आधार पर मूंग, चावल, बासमती, मोटे अनाज, तुअर और अन्य संभावित कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सहकारी समितियों को निर्यातकों से जोड़ने तथा कम से कम एक-दो कृषि उत्पादों की प्रायोगिक निर्यात खेप भेजने की दिशा में एपीडा से तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इससे किसानों और संगठनों को निर्यात की प्रक्रिया समझने तथा बाजार तक पहुंच बनाने का व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा।

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पैक हाउस और दलहन प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर जोर

सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने क्षेत्र में एकीकृत पैक हाउस के साथ दलहन की श्रेणीकरण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने एपीडा के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से क्षेत्र के किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों को पात्र योजनाओं के तहत परियोजना प्रस्ताव तैयार करने में तकनीकी मार्गदर्शन देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने, उनकी बेहतर पैकेजिंग करने और निर्यात के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।

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जीआई गुड़, बरमान घाट बैंगन और गाडरवारा की तुअर दाल पर चर्चा

सांसद ने नरसिंहपुर के जीआई पहचान प्राप्त गुड़ और बरमान घाट बैंगन को केवल प्रमाणन तक सीमित न रखते हुए इनके गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग, निर्यात के अनुकूल पैकेजिंग, खरीदारों से संपर्क और प्रायोगिक निर्यात की कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही उन्होंने गाडरवारा की तुअर दाल के जीआई आवेदन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने और लंबित तकनीकी एवं दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरा करने में एपीडा से सहयोग मांगा। उन्होंने यह भी कहा कि जीआई पहचान की प्रक्रिया के समानांतर तुअर दाल के संभावित निर्यात बाजार की तैयारी भी शुरू की जानी चाहिए।

गुणवत्ता जांच और स्थानीय स्तर पर नमूना संग्रह की सुविधा की मांग

सांसद चौधरी ने नर्मदापुरम और नरसिंहपुर क्षेत्र के किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों के लिए स्थानीय स्तर पर नमूना संग्रह और गुणवत्ता जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने जैविक और निर्यातोन्मुख कृषि उत्पादों के लिए अवशेषों की जांच, गुणवत्ता प्रमाणन तथा खेत स्तर पर उपज की पहचान और निगरानी की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया।

नर्मदापुरम या नरसिंहपुर में खरीदार-विक्रेता बैठक का सुझाव

दर्शन सिंह चौधरी ने एपीडा के सहयोग से नर्मदापुरम या नरसिंहपुर में जिला स्तरीय खरीदार-विक्रेता बैठक आयोजित करने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र के जीआई पहचान प्राप्त और अन्य संभावित निर्यात उत्पादों को एपीडा के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में प्रमुखता से प्रदर्शित करने का सुझाव भी दिया, ताकि क्षेत्रीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।

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