ऊना में आलू की फसल पर सुंडी का हमला, मिट्टी के भीतर से काट रही पौधे
11 अक्टूबर 2026, ऊना: ऊना में आलू की फसल पर सुंडी का हमला, मिट्टी के भीतर से काट रही पौधे – जिले के उपतहसील जोल क्षेत्र के चकसराय और आसपास के गांवों में आलू की फसल पर सुंडी का प्रकोप देखा गया है। गुरुवार सुबह किसानों को अपने कई खेतों में आलू के पौधे सूखे हुए मिले, जिससे इलाके के आलू उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है।
जब किसानों ने सूखे पौधों को उखाड़कर देखा, तो पता चला कि मिट्टी के भीतर एक सुंडी पौधों को तने के पास से ही काट रही है। इस वजह से ऊपर से हरे-भरे दिख रहे पौधे अचानक सूख जाते हैं और खेत में बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है।
इस तरह का प्रकोप पहचानने में आम तौर पर देर हो जाती है, क्योंकि नुकसान जमीन के भीतर शुरू होता है और ऊपर से पौधा सूखने के बाद ही किसानों को इसका पता चलता है।
कृषि विभाग ने दी तीन दवाओं के छिड़काव की सलाह
ऊना के कृषि विकास अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि विभाग की संस्तुति के अनुसार किसानों को प्रभावित खेतों में एम-45, कार्बेन्डाजिम और क्लोरोपायरीफॉस जैसी दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि किसान सही मात्रा और छिड़काव का तरीका जानने के लिए नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय से जरूर संपर्क करें, क्योंकि प्रकोप की स्थिति हर खेत में अलग-अलग हो सकती है।
बैरियां गांव के किसान प्रेम चंद का कहना है कि इस बार बिजाई के समय हुई बारिश के कारण कई खेतों में पौधे पहले से ही कम उगे थे। उनके मुताबिक अब फसल निकलने के बाद सुंडी के प्रकोप से परेशानी और बढ़ गई है, और मौसम की अनिश्चितता को लेकर भी किसान चिंतित हैं।
वहीं इसी गांव के किसान मुनीश कुमार का कहना है कि नुकसान का कारण पता चलने के बाद किसान अब कृषि विभाग की सलाह ले रहे हैं और उसी के मुताबिक कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोशिश यही है कि प्रकोप को शुरुआती स्तर पर ही रोक लिया जाए, ताकि आगे ज्यादा नुकसान न हो।
ऊना जिला आलू की खेती के लिए जाना जाता है, और यहां के कई किसानों की सालाना आमदनी का एक हिस्सा इसी फसल से आता है। बारिश से हुई देर बुवाई और उसके बाद सुंडी के इस प्रकोप ने इस बार ऊना के आलू किसानों के लिए सीजन को पहले से ज्यादा मुश्किल बना दिया है।
आलू की फसल अभी बढ़ने के दौर में है, इसलिए किसानों की कोशिश यही है कि कृषि विभाग की सलाह के मुताबिक समय पर छिड़काव कर अगले कुछ हफ्तों में प्रकोप को काबू में रखा जाए, ताकि आने वाली उपज पर इसका ज्यादा असर न पड़े।
मिट्टी के भीतर पलने वाले ऐसे कीटों का प्रकोप आम तौर पर नमी और तापमान की खास परिस्थितियों में ज्यादा बढ़ता है, और एक बार पौधे की जड़ या तने के पास नुकसान शुरू हो जाने पर ऊपर से छिड़काव का असर सीमित रह जाता है। यही वजह है कि किसानों को प्रकोप दिखते ही जल्द से जल्द कृषि विभाग से संपर्क करने और सही दवा व मात्रा की सलाह लेने की जरूरत होती है, ताकि नुकसान ज्यादा खेतों तक न फैले।
जमीन के भीतर पलने वाले इस तरह के कीट आम तौर पर तब ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं जब खेत में पहले से नमी ज्यादा रही हो, जैसा कि इस सीजन में बिजाई के समय हुई बारिश के बाद देखा गया है। आलू का पौधा जमीन के भीतर ही अपनी ज्यादातर उपज तैयार करता है, इसलिए तने और जड़ के पास होने वाला यह नुकसान सीधे फसल की पैदावार पर असर डाल सकता है।
खेत में सुंडी का असर दिखने के बाद आम तौर पर सिर्फ प्रभावित हिस्से तक छिड़काव सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि आसपास स्वस्थ दिख रहे पौधों की भी जांच की जाती है, क्योंकि ऐसा प्रकोप तेजी से आगे फैल सकता है।
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