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राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान के पशु प्रजनन फार्म कुम्हेर में खुलेगा पशुपालक प्रशिक्षण केंद्र

10 मार्च 2023, जयपुर: राजस्थान के पशु प्रजनन फार्म कुम्हेर में खुलेगा पशुपालक प्रशिक्षण केंद्र – राज्य बजट 2023-2024 में मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत द्वारा पशु प्रजनन फार्म कुम्हेर में पशुपालक प्रशिक्षण केंद्र खोलने की घोषणा जल्द ही साकार होने वाली है। इसके लिये पशुपालन विभाग ने तैयारियॉं शुरू कर दी हैं।

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. गजेंद्र सिंह चाहर ने बताया कि प्रशिक्षण केन्द्र शुरू होने से  प्रदेश में उन्नत एवं समृद्ध पशुपालन की दिशा में बेहतर कार्य हो सकेंगे, साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा। राज्य सरक़ार के पशुपालकों के कल्याण की संकल्पना को साकार करने की दिशा में पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं का बेहतर संचालन किया जा रहा है। राज्य में पालतू पशुओं की उच्च नस्ल संवर्धन का कार्य किया जा रहा है जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि के साथ रोजगार के साधन भी विकसित हो रहे है।

भरतपुर जिला स्थित पशु प्रजनन फार्म, कुम्हेर बकरी नस्ल संवर्धन का राज्य में अग्रणी एवं एकमात्र केंद्र है। यहाँ मुख्यतया जमुनापारी नस्ल की बकरी/बकरों का उत्पादन कर पशुपालकों को बकरी नस्ल संवर्धन के लिए अनुदानित दरों पर  वितरण किया जाता है। फार्म के जरिये विभाग द्वारा किये जा रहे प्रयासों से राज्य में बकरी पालन में उन्नत नस्ल सुधार के साथ स्थानीय पशुपालकों के लिए रोजगार एवं आय के साधन भी विकसित हुए है ।

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यह फार्म 1959 तक भरतपुर राजपरिवार के द्वारा संचालित किया जाता था। तब यह फार्म श्रीकृष्ण गौशाला के नाम से जाता था। 1959 में यह फार्म पशुपालन विभाग के अधीन किया गया और हरियाणा नस्ल की उन्नत गौवंश के संवर्धन की योजना का आरम्भ हुआ। उसके बाद यह फार्म बकरी पालन का केंद्र बना. आज भी यह फार्म उन्नतशील पशुपालकों के लिए  आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस फार्म पर पशुपालकों के लिए तमाम आवश्यक सुविधाओं के साथ पशु चिकित्सा केंद्र भी है। 

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उल्लेखनीय है कि जमुनापारी नस्ल की बकरी मांस और दूध उत्पादन की दृष्टि से उत्तम मानी जाती है। मुख्यतया भारतीय नस्ल की इस बकरी का नाम यमुना नदी के नाम पर जमुनापारी पड़ा। शीघ्र ही वजन बढ़ाने में सक्षम इस नस्ल की बकरी पशुपालकों के लिए आय का एक मुख्य स्रोत साबित होती है। साथ ही बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ तापमान के अनुरूप जीवन क्षमता रखने वाली यह नस्ल पशुपालकों के लिए एक महत्वपूर्ण पशुधन है ।

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