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राज्य कृषि समाचार (State News)

मोटे अनाज की बढ़ती मांग के बीच युवाओं को मिली प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग, सीखें कुकीज से खाखरा तक बनाना  

22 अगस्त 2026, भोपाल: मोटे अनाज की बढ़ती मांग के बीच युवाओं को मिली प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग, सीखें कुकीज से खाखरा तक बनाना – मोटे अनाज और पारंपरिक फसलों की बढ़ती मांग को देखते हुए युवाओं को इनसे आधुनिक खाद्य उत्पाद तैयार करने और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रशिक्षण दिया गया। सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत ‘मेवाड़ क्षेत्र की पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण का उत्कृष्टता केंद्र’ परियोजना के अंतर्गत हुआ।

मिलेट्स से आधुनिक खाद्य उत्पाद तैयार करने की ट्रेनिंग

प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाज और अन्य पारंपरिक फसलों में मूल्य संवर्धन कर उन्हें बाजार की मांग के अनुसार खाद्य उत्पादों में बदलने की तकनीक सिखाई गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रकार के कुकीज, केक और मफिन्स तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।

इसके साथ ही युवाओं ने चॉकलेट, पौष्टिक बार, चकली, खाखरा और क्रैकर्स सहित कई अन्य मूल्यवर्धित खाद्य उत्पाद तैयार करना भी सीखा। प्रशिक्षण में केवल उत्पाद बनाने पर ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, आकर्षक प्रस्तुतीकरण और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकास पर भी ध्यान दिया गया।

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मिलेट्स के स्वास्थ्य लाभ और बाजार की मांग की जानकारी

महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सरला लखावत ने प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को मिलेट्स की बढ़ती उपयोगिता, उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती मांग और दैनिक आहार में इनके इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को मिलेट आधारित खाद्य पदार्थों को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रेरित किया। परियोजना प्रभारी डॉ. कमला महाजनी ने मोटे अनाज और मिलेट्स से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के साथ इनके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की संभावनाओं के बारे में बताया।

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उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग पर भी जोर

खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की प्रोफेसर डॉ. रेनू मोगरा ने मिलेट्स में मूल्य संवर्धन की संभावनाओं और उनसे पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार करने की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं अतिथि संकाय सदस्य डॉ. पायल तलेसरा ने मिलेट आधारित उत्पादों के गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं के बारे में बताया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को यह भी समझाया गया कि पारंपरिक फसलों से तैयार उत्पादों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर बाजार की मांग के अनुरूप विकसित किया जा सकता है।

स्वरोजगार के लिए तैयार होंगे युवा

पांच दिवसीय प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को पारंपरिक फसलों से जुड़े उत्पादों को आधुनिक स्वरूप देने, नए खाद्य उत्पाद विकसित करने और उन्हें स्वरोजगार के अवसरों में बदलने का व्यावहारिक अनुभव मिला। मिलेट्स और अन्य पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के जरिए युवा स्थानीय स्तर पर छोटे खाद्य व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

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