धान की 24 हजार 750 प्रजातियां संग्रहण वाले अक्ती जैवविविधता संग्रहालय का लोकार्पण

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12 अक्टूबर 2021, रायपुर । धान की 24 हजार 750  प्रजातियां संग्रहण वाले अक्ती जैवविविधता संग्रहालय का लोकार्पण – मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। गौठानों में गोबर से जैविक खाद के निर्माण, बिजली उत्पादन और वैल्यू एडीशन के कार्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 मुख्यमंत्री ने आर.एल. रिछारिया प्रयोगशाला में धान की 24 हजार 750 पारंपरिक प्रजातियों एवं अन्य फसलों की 6 हजार 125 प्रजातियों के जनन द्रव्य संग्रहण हेतु निर्मित अक्ती जैवविविधता संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस संग्रहालय में धान एवं अन्य फसलों की 30 हजार 875 प्रजातियों को भौतिक रूप से प्रदर्शन किया गया है तथा उनके विशिष्ट गुण एवं विस्तृत जानकारियां डिजीटल रूप में प्रदर्शित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस अक्ती जैव विविधता संग्रहालय का लोकार्पण किया गया है, उसमें तिंवरा की 1009, अलसी की 2000 किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इसके अलावा किसान भाइयों की लगभग 500 से अधिक प्रजातियों का पंजीयन भारत सरकार में कराया गया है। ये प्रजातियां भी जैव विविधता संग्रहालय में प्रदर्शित की गई हैं। इन प्रजातियों का उपयोग नयी प्रजातियों के विकास के लिए होगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय बनने के बाद से आज तक विभिन्न फसलों की कुल 154 प्रजातियों का विकास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित चांवल से प्रोटीन, ग्लूकोज, शुगर सीरप के निर्माण की तकनीक का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 8 नवीन फसल प्रजातियों को जारी की, जिनमें धान की बौनी विष्णुभोग, बौनी सोनागाठी, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, मक्के की सी.जी. अगेती संकर मक्का, सोयाबीन की छत्तीसगढ़ सोयाबीन-1115, करायत की सी.जी. करायत-1 तथा गूसबेरी की सी.जी. केप गूसबेरी-1 प्रजातियां शामिल हैं।

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