खरीफ सीजन के लिए कृषि विभाग का अलर्ट: अधिक उत्पादन और कम जोखिम के लिए अपनाएं ये उपाय
26 जून 2026, भोपाल: खरीफ सीजन के लिए कृषि विभाग का अलर्ट: अधिक उत्पादन और कम जोखिम के लिए अपनाएं ये उपाय – खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने किसानों के लिए तकनीकी सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों को मिट्टी की तैयारी, बीज की गुणवत्ता, सिंचाई प्रबंधन, खाद एवं उर्वरक के उपयोग, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा फसल विविधीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके और खेती से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके।
क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार करें फसल का चयन
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और सिंचाई सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए फसल का चयन करें। किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की भी सलाह दी गई है, जिससे वे विभिन्न प्रकार के जोखिमों से बच सकें और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे।
मिट्टी की संरचना में सुधार के लिए जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया गया है। साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले और अच्छी अंकुरण क्षमता वाले प्रमाणित बीजों का उपयोग करने तथा बीज की उचित मात्रा रखने की सलाह दी गई है।
मेड़-नाली और ब्रॉडबेड फरो पद्धति अपनाने की सलाह
विभाग ने किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुआई मेड़-नाली पद्धति या ब्रॉडबेड फरो पद्धति से करने की सलाह दी है। इससे फसलों को जलभराव एवं सूखे जैसी परिस्थितियों से बचाया जा सकता है और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
इसके साथ ही किसानों को मौसम के अनुसार सिंचाई करने और समय-समय पर मिट्टी की नमी की जांच करते रहने की सलाह दी गई है।
खाद और उर्वरक का करें संतुलित उपयोग
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक ने किसानों से खाद एवं उर्वरकों का उपयोग सही मात्रा में करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग फसल की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए आवश्यक है।
खरपतवार, कीट और रोग नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि फसल की बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर निराई-गुड़ाई करें। आवश्यकता होने पर रासायनिक खरपतवारनाशकों का उपयोग सावधानीपूर्वक और निर्धारित निर्देशों के अनुसार करें।
इसके अलावा कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए किसानों को फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की जानकारी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर कीटनाशक एवं फफूंदनाशकों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की सलाह दी गई है।
फसल विविधीकरण से कम होगा जोखिम
कृषि विभाग ने किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न फसलों की खेती करने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार फसल विविधीकरण से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और खेती में जोखिम भी कम होता है।
खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, उड़द और मूंग प्रमुख फसलें हैं। किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार इन फसलों का चयन कर सकते हैं।
मौसम की जानकारी पर रखें नजर
विभाग ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने तथा उसी के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी है। साथ ही समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लेने और अन्य किसानों के अनुभवों से सीखने की भी अपील की गई है।
कृषि विभाग का कहना है कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर, उचित फसल प्रबंधन और समय पर कृषि कार्यों के माध्यम से किसान खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं तथा खेती से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
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