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राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि विश्वविद्यालय ने बार्क के सहयोग से विकसित की धान की दो नवीन म्यूटेंट किस्में

सफरी-17 से विक्रम टी.सी.आर. और जवाफूल से सी.जी. ट्राॅम्बे जवाफूल विकसित

परंपरागत किस्मों की अपेक्षा बौनी, जल्द पकने वाली और अधिक उपज देने वाली हैं नवीन किस्में

13 जुलाई 2020, रायपुर। कृषि विश्वविद्यालय ने बार्क के सहयोग से विकसित की धान की दो नवीन म्यूटेंट किस्में – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा भाभा अटाॅमिक रिसर्च सेन्टर (बार्क), मुम्बई के सहयोग से धान की दो नवीन म्यूटेन्ट किस्मंे – विक्रम ट्राॅम्बे छत्तीसगढ़ राईस और छत्तीसगढ़ ट्राॅम्बे जवाफूल विकसित की गई हैं। ये नवीन म्यूटेन्ट किस्में छत्तीसगढ़ की परंपरागत किस्मों क्रमशः सफरी-17 और जवाफूल में उत्परिवर्तन के द्वारा सुधार कर विकसित की गई हैं।

नवीन किस्में परंपरागत किस्मों की अपेक्षा बौनी, शीघ्र पकने वाली और अधिक उपज देने वाली हैं। विक्रम टी.सी.आर. किस्म परंपरागत सफरी-17 की तुलना में 30-35 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है और 21 प्रतिशत अधिक उत्पादन देती है। इसी प्रकार सी.जी. जवाफूल ट्राॅम्बे किस्म परंपरागत जवाफूल की तुलना में 10-15 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है और 40 प्रतिशत अधिक उपज देती है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज उप समिति द्वारा इन दोनों किस्मों को छत्तीसगढ़ राज्य के लिए जारी करने की अनुशंसा की गई है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा भाभा अटाॅमिक रिसर्च सेन्टर के सहयोग से धान की दो परंपरागत किस्मों में उत्परिवर्तन के माध्यम से सुधार कर विकसित की गई दो नवीन किस्मों मंे से विक्रम ट्राॅम्बे छत्तीसगढ़ राईस की उत्पादन क्षमता संकर धान की किस्मों के बराबर पाई गई है। इस किस्म के पौधों की ऊंचाई 101-106 से.मी. है जबकि परंपरागत सफरी-17 प्रजाति के पौधों की ऊंचाई 160-165 से.मी. है। पौधों की ऊंचाई कम होने के कारण विक्रम टी.सी.आर. के पौधों के गिरने (लाॅजिंग) का खतरा कम होता है। इसके पकने की अवधि 118-123 दिन है जो परंपरागत सफरी प्रजाति की तुलना में 30 से 35 दिन कम है। यह किस्म कम पानी या सूखे की स्थिति में भी परंपरागत सफरी प्रजाति के जितना ही उत्पादन देती है।

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यह किस्म 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है। यह प्रजाति मुर्रा बनाने के लिए उपयुक्त पाई गई है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ की सुगंधित चावल की परंपरागत किस्मे जवाफूल में सुधार द्वारा विकसित किस्म सी.जी. ट्राॅम्बे जवाफूल छोटे दानों की सुगंधित बौनी किस्म है। इस किस्म के पौधों की ऊंचाई 120-125 से.मी. होने के कारण पौधे गिरते नहीं हैं जबकि परंपरागत जवाफूल प्रजाति के पौधों की ऊंचाई 145-150 से.मी. होने के कारण पौधे तेज हवा या बरसात से गिर जाते हैं। सी.जी. ट्राॅम्बे जवाफूल किस्म के पकने की अवधि 130-135 दिन है जो परंपरागत जवाफूल प्रजाति की तुलना में 10-15 दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है। इसकी अधिकतम उपज क्षमता 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

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  • (संजय नैयर) सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी