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राज्य कृषि समाचार (State News)

प्रयागराज हादसे के बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ की चिंता

31 जनवरी 2025, उज्जैन: प्रयागराज हादसे के बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ की चिंता – आगामी 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होना है और इसे लेकर अब न केवल प्रशासन बल्कि शासन स्तर पर भी तैयारियां हो रही है लेकिन हाल ही में प्रयागराज महाकुंभ में जो हादसा हुआ है उसके बाद उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ में आने वाली भीड़ का प्रबंधन को लेकर चिंता जताई जा रही है।

प्रयागराज हादसे के बाद मध्य प्रदेश की सरकारी मशीनरी का ध्यान उज्जैन में ‘भीड़ प्रबंधन’ पर केंद्रित हो गया है। सक्रिय उपायों की योजना बनाकर उन्हें लागू कराने के लिए प्रदेश के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजोरा उज्जैन आ रहे हैं। राजोरा दो और तीन फरवरी को स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। सिंहस्थ-2028 के प्रचलित एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करेंगे। संभव हुआ तो स्थल निरीक्षण भी करेंगे। बता दें, उज्जैन, भगवान महाकाल की नगरी है जहां बारह मास तीज-त्योहार, उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। हर 12 वर्ष के अंतराल पर यहां महाकुंभ सिंहस्थ का भी आयोजन होता है। इसमें करोड़ों साधु-संत और श्रद्धालु मोक्ष की कामना से शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं। अगला सिंहस्थ 2028 में होगा। इसमें 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान शासन-प्रशासन ने लगाया है।  मौनी अमावस्या पर प्रयागराज कुंभ में संगम किनारे भीड़ प्रबंधन गड़बड़ाने से भगदड़ मची और कई लोगों की जान चली गई। कई गंभीर घायल भी हुए। ऐसा उज्जैन में न हो, इसके लिए गलतियों से सबक लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए तैयारी बना रहा है। शासन-प्रशासन ने महाकालेश्वर मंदिर, काल भैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर सहित रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट तरफ जाने वाले रास्तों को मास्टर प्लान के अनुरूप चौड़ा करने, पुल-पुलियाओं का दोहरीकरण करने, घाटों का विस्तार करने, निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग कर ड्रोन, कैमरे, संकेतक लगाने की योजना बनाई गई है। निश्चित तौर पर प्रयागराज और नासिक महाकुंभ के अनुभवों का लाभ साल-2028 में उज्जैन को मिलेगा। गहरे अनुभवों के आधार पर ‘उज्जैन : महाकुंभ सिंहस्थ’ के लिए भीड़ प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा प्रबंधन और कचरा प्रबंधन की ऐसी योजना लागू होगी जो दुनियाभर के लिए शोध और सीख का विषय बनेगी। बता दें कि प्रयागराज के बाद 2027 में नासिक में, फिर 2028 में उज्जैन में महाकुंभ लगना है। उज्जैन में पेयजल, बिजली सहित तमाम बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कुल 18 हजार करोड़ रुपये की योजना बनाई है।

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