राज्य कृषि समाचार (State News)

जैविक खेती अपनाओ जीवन को आनंदमय बनाओं

21 फ़रवरी 2025, भोपाल: जैविक खेती अपनाओ जीवन को आनंदमय बनाओं – बीते कुछ वर्षों से किसानों द्वारा जैविक खेती की जाने लगी है वहीं सरकार भी जैविक खेती को ही प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को विभिन्न योजनाओं का भी लाभ दे रही है। जो किसान भाई जैविक खेती कर रहे है उनका यह कहना है कि उन्होंने जैविक खेती को अपनाकर अपना जीवन आनंदमय बना लिया है अर्थात जैविक उत्पादों की मांग अधिक है और इस कारण उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई है।

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क्या है जैविक खेती 

जैविक खेती कृषि की वह विधि है जो संश्लेषित उर्वरकों एवं संश्लेषित कीटनाशकों के अप्रयोग या न्यूनतम प्रयोग पर आधारित है तथा जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिये फसल चक्र, हरी खाद, कम्पोस्ट आदि का प्रयोग करती है। ] सन् 1990 के बाद से विश्व में जैविक उत्पादों का बाजार काफी बढ़ा है। भारत वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है अधिक उत्पादन के लिये खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है जिससे कृषक के पास कम जोत में अत्यधिक लागत लग रही है और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है साथ ही खाद्य पदार्थ भी जहरीले हो रहे हैं। इसलिए इस प्रकार की उपरोक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिये गत वर्षों से निरंतर टिकाऊ खेती के सिद्धांत पर खेती करने की सिफारिश की गई, जिसे प्रदेश के कृषि विभाग ने इस विशेष प्रकार की खेती को अपनाने के लिए, बढ़ावा दिया जिसे हम जैविक खेती प्रचार-प्रसार कर रही है।

जैविक खेती से होने वाले लाभ

  • भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है।
  • सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है।
  • रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है।
  • फसलों की उत्पादकता में वृद्धि।
  • बाजार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
  • जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है।
  • भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं।
  • भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होगा।
  • भूमि के जलस्तर में वृद्धि होती है। भूमि के जल मे स्तर मे वृद्धि क्रियाशील होता हैं।
  • मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है।
  • कचरे का उपयोग, खाद बनाने में, होने से बीमारियों में कमी आती है।
  • फसल उत्पादन की लागत में कमी एवं आय में वृद्धि
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