राज्य कृषि समाचार (State News)

इंदौर में प्राकृतिक खेती का मॉडल, हल्दी की कई किस्मों की खेती के साथ खुद कर रहे प्रोसेसिंग-मार्केटिंग; 2-3 लाख प्रति एकड़ शुद्ध लाभ

05 सितंबर 2026, इंदौर: इंदौर में प्राकृतिक खेती का मॉडल, हल्दी की कई किस्मों की खेती के साथ खुद कर रहे प्रोसेसिंग-मार्केटिंग; 2-3 लाख प्रति एकड़ शुद्ध लाभ – इंदौर जिले में प्राकृतिक खेती करने वाले किसान खेती के साथ कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से भी आय बढ़ा रहे हैं। ग्राम सिमरोल, महू में प्राकृतिक खेती करने वाले कृषक जितेन्द्र पाटीदार के खेत का संयुक्त संचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह एवं उनकी टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान 3 एकड़ में लगाई गई हल्दी की विभिन्न किस्मों और किसान द्वारा स्थापित प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन किया गया।

हल्दी की कई किस्मों की खेती

कृषक जितेन्द्र पाटीदार के खेत में वायगांव, राजापुरी और सेलम सहित हल्दी की विभिन्न किस्मों की खेती की गई है। इनमें 3 से 7 प्रतिशत तक करक्यूमिन पाया जाता है। इसके अलावा आमा हल्दी और कस्तूरी हल्दी की किस्मों के फील्ड का भी निरीक्षण किया गया। कृषक ने बताया कि हल्दी से हल्दी पाउडर और मिल्क स्पेशल हल्दी पाउडर तैयार कर रहे हैं। वहीं हल्दी के पत्तों से तेल निकालकर टर्मरिक कोकोनट ऑयल भी बना रहे हैं, जो स्किन के लिए उपयोगी है।

खुद की प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर कर रहे मार्केटिंग

कृषक पाटीदार ने हल्दी प्रोसेसिंग के लिए स्वयं की यूनिट भी स्थापित की है। इसके माध्यम से हल्दी में वैल्यू एडिशन कर विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं और उनकी मार्केटिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद ई-प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं। कृषक के अनुसार इस मॉडल से प्रति एकड़ 2 से 3 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर का भी किया अवलोकन

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसान द्वारा स्थापित बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर का भी अवलोकन किया। इसके साथ ही सोयाबीन दिवस के अवसर पर ग्राम मेंमदी, महू में केंद्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह, अनुसंधान समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.के. बंगा और संयुक्त संचालक कृषि श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने किसानों के साथ सहभागिता की। इस दौरान किसानों को सोयाबीन की फसल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। अधिकारियों ने सोयाबीन की खेती के फायदे, बेहतर उत्पादन के तरीके और फसल में होने वाले नुकसान के कारणों के बारे में किसानों को बताया। साथ ही कीट और रोगों से बचाव के संबंध में भी सलाह दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी कि यदि पानी नहीं गिरता है तो फसलों में हल्की सिंचाई करें।

NRC-150 किस्म के प्रदर्शन का निरीक्षण

इसके बाद अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने उन्नत किसानों के खेतों पर पहुंचकर सोयाबीन की नई किस्म NRC-150 के प्रदर्शन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान फसल की स्थिति बहुत अच्छी पाई गई। निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि इंदौर श्री संदीप यादव, प्राचार्य कृषक प्रशिक्षण केन्द्र श्री चौहान, अनुविभाग कृषि अधिकारी श्री शोभाराम असके, सहायक संचालक कृषि श्री दिलीप जाट एवं देवी सिंह वर्मा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी महू श्री सर्वजया कोकोडे, विकासखंड तकनीकी प्रबंध श्रीमती मीति गुप्ता, कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती करिश्मा कनेल, कृषि विस्तार अधिकारी श्री छतर सिंह डुडवे सहित उन्नत कृषकगण मौजूद रहे।

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