प्रदेश के 21 लाख किसानों से हुई 98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी

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18 फरवरी 2022, रायपुर । प्रदेश के 21 लाख किसानों से हुई 98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की दूरदर्शी सोच और उदार फैसलों का नतीजा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के चालू सीजन में लगभग 98 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी हुई है। प्रदेश में अब तक 21.77 लाख किसानों ने सुगमता पूर्वक उपार्जन केन्द्रों में धान विक्रय किया है। धान खरीदी के साथ ही समांतर रूप से कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव तेजी से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के आह्वान पर अब तक मिलर्स द्वारा डीओ और टीओ के माध्यम से 67 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। छत्तीसगढ़ राज्य केन्द्रीय पूल में चावल जमा कराने के मामले में भी तेजी से काम कर रही है। अब तक 17.98 लाख मीट्रिक टन केन्द्रीय पूल में गुणवत्तापूर्ण चावल जमा करा चुके हैं। इनमें भारतीय खाद्य निगम में 9.90 लाख मीट्रिक टन और नागरिक आपूर्ति निगम में 8.08 लाख मीट्रिक टन जमा चावल शामिल है।

खाद्य सचिव श्री टोपेश्वर वर्मा ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री की पहल पर इस वर्ष धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान का तेजी से उठाव भी किया जा रहा है। अब तक डीओ और टीओ के माध्यम से 67 लाख मीट्रिक टन धान का रिकार्ड उठाव हो चुका है। श्री वर्मा ने बताया कि 55 लाख 04 हजार मीट्रिक टन धान का डीओ जारी कर दिया गया है।

उपार्जन केन्द्रों से मिलर्स द्वारा 49 लाख 20 हजार मीट्रिक धान का उठाव कर लिया गया है। इसी प्रकार 22 लाख 13 हजार मीट्रिक टन धान के परिवहन के लिए टी.ओ. जारी किया गया है। जिसके विरूद्ध समितियों से 17 लाख 80 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी की शुरूआत 1 दिसम्बर 2021 से हुई है। किसानों के सहुलियत के लिए किसानों की मांग पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी का आखिरी तिथि 7 फरवरी तय किया था। धान खरीदी के समांतर ही खरीदी केन्द्रों से धान का उठाव और कस्टम मिलिंग भी युद्ध स्तर पर जारी है। इस साल धान बेचने के लिए रिकार्ड 24 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है।

पंजीकृत धान का रकबा भी 30 लाख 11 हजार हेक्टेयर से अधिक है। खाद्य विभाग के सचिव श्री वर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ को इस साल केन्द्रीय पूल में 61.65 लाख मीट्रिक टन अरवा चावल जमा कराना है। इसके लिए तेजी से कस्टम मिलिंग किया जा रहा है।

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