राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन संस्थान की 25 वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक संपन्न

10 सितम्बर 2022, इंदौर: सोयाबीन संस्थान की 25 वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक संपन्न – भाकृअप -भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर की 25 वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की दो दिवसीय बैठक गत दिनों आयोजित की गई। हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के पूर्व कुलपति डॉ एस.के. शर्मा की अध्यक्षता में गठित इस समिति में देश के शीर्ष वैज्ञानिक डॉ के.आर कौंडल (भूतपूर्व निदेशक, राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ली), डॉ ओ.पी.शर्मा (पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन संस्थान, नईदिल्ली), डॉ टी. के. आद्या (पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय चावल अनुसन्धान संस्थान, कटक) के साथ-साथ भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ संजीव गुप्ता समेत आईसीएआर-आईआईएसआर इंदौर के तीनों विभागों के अध्यक्ष डॉ संजय गुप्ता, डॉ महावीर प्रसाद शर्मा एवं डॉ बी.यु.दुपारे सहित सभी वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

बैठक में संस्थान के प्रभारी निदेशक, डॉ संजय गुप्ता ने संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि भारत की सबसे लोकप्रिय सोयाबीन किस्म जे.एस. 335 को संस्थान के वैज्ञानिकों के सतत प्रयासों से पीली मोज़ैक बीमारी से मुक्त कर लिया गया है, साथ ही 60 प्रतिशत तक ओलिक अम्ल युक्त सोयाबीन का विकास भी संस्थान द्वारा कर लिया गया है। संस्थान द्वारा सोयाबीन की नई किस्मों के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संस्थान द्वारा 3S1Y परियोजना प्रारम्भ की गई है, जिससे मात्र एक साल की अवधि में किसानों को सीमित मात्रा में नवीनतम गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध करवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है ।

समिति के अध्यक्ष डॉ एस.के. शर्मा ने सुझाव दिया कि सोयाबीन में फोटोथर्मल इंसेन्सिटिविटी के ऊपर अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ सहकार्यता एवं संबंधित वैज्ञानिकों की कार्यक्षमता में वृद्धि हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम करें ।वहीं इस बैठक में विशेष रूप से उपस्थित भा.कृ.अनु.प के सहायक महानिदेशक (तिलहन व दलहन) डॉ संजीव गुप्ता ने उत्तर भारत में धान-गेहूं आधारित फसल प्रणाली में सोयाबीन को सम्मिलित कर के फसल विविधता को बढ़ावा देने हेतु उपयुक्त सोयाबीन किस्मों का विकास एवं सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक, आयरन, मॉलिब्डेनम तथा सल्फर की पूर्ति हेतु उपाय तथा योजना बनाने पर ज़ोर दिया।

समिति ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट, अनुसंधान परियोजनाओं की सूची एवं गत वर्ष की उपलब्धियों का अवलोकन कर संस्थान के प्रयासों की सराहना की। इसके पहले समिति के सचिव डॉ.एम.पी. शर्मा ने पिछली बैठक की सिफारिशों पर कार्रवाई प्रस्तुत कर विभिन्न परियोजनाओं की प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियां बताईं जिसमें फसल सुधार, फसल उत्पादन और फसल संरक्षण अनुभागों के कार्यों की समिति ने प्रशंसा की गई। बैठक के दूसरे दिन समिति द्वारा ग्राम उमरीखेडा स्थित प्रगतिशील कृषक श्री देवराज पाटीदार के खेतों का भ्रमण कर संस्थान द्वारा विकसित सोयाबीन किस्में एनआरसी 130, एनआरसी 138, एनआरसी 142 तथा जैविक सोयाबीन उत्पादन के खेत पर चर्चा कर प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन किया गया।

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