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राज्य कृषि समाचार (State News)

बुरहानपुर में किसानों को प्राकृतिक खेती सिखाने 20 क्लस्टरों का गठन, खेतों पर होगा लाइव प्रशिक्षण और प्रदर्शन  

29 मार्च 2026, बुरहानपुर: बुरहानपुर में किसानों को प्राकृतिक खेती सिखाने 20 क्लस्टरों का गठन, खेतों पर होगा लाइव प्रशिक्षण और प्रदर्शन – मध्य प्रदेश सहित बुरहानपुर जिले में कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों को खेती की लाभकारी पद्धतियों से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जिले में प्राकृतिक खेती के लिये किसानों को प्रेरित करने और उन्हें प्राकृतिक खेती सीखाने हेतु 20 क्लस्टरों का गठन किया गया है।

क्लस्टरों के माध्यम से विभाग द्वारा किसानों के खेतों पर जाकर प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे किसान कम लागत में सुरक्षित और लाभकारी विधि अपनाकर उन्नत खेती कर सके। यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण एवं मिट्टी की उत्पादन क्षमता को बनाये रखने में सहायक होगा। प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी की सेहत को बेहतर रखा जा सकता है।

खेत स्तर पर दिया जा रहा प्रशिक्षण

उपसंचालक कृषि श्री एम.एस. देवके ने जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजर श्री अनिल रावत द्वारा ग्रामों में फील्ड स्तर पर किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों की जानकारी दी जा रही है। किसानों को जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक घोल खेत पर ही तैयार करने की विधि बतलाई गयी। इसके साथ ही फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने तथा फसल सुरक्षा के लिए प्राकृतिक उपायों की भी जानकारी दी गयी।

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फील्ड अधिकारियों के जरिये जिले में प्राकृतिक खेती को प्रभावी रूप से अपनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों से अपील भी की जा रही है कि वे प्राकृतिक खेती अवश्य अपनाएं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड- मृदा की गुणवत्ता, पोषण स्तर की पहचान प्राकृतिक खेती के साथ-साथ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता और पोषण स्तर की विस्तृत जानकारी दी जाती है।

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प्रत्येक 2-3 वर्ष में मिट्टी परीक्षण के माध्यम से फसल उत्पादन बढ़ाने और अनावश्यक उर्वरक खर्च कम करने में सहायक है। पर्यावरण और मृदा के लिए लाभदायक प्राकृतिक खेती एक संतुलित और भविष्य उन्मुख खेती पद्धति मानी जाती है। इससे मृदा की उर्वरता बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

इस पद्धति में केंचुए जैसे लाभकारी सूक्ष्म जीवों का संरक्षण होता है, जिन्हें किसान का मित्र भी कहा जाता है। इसके अलावा लेडीबग, लेसविंग, परजीवी ततैया, ग्राउंड बीटल और हॉवरफ्लाई जैसे लाभकारी कीट हानिकारक कीटों को नियंत्रित कर फसल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्राकृतिक उत्पादों के लिये बाजार की सुविधा कृषक कल्याण वर्ष अंतर्गत बुरहानपुर जिले में जैविक खेती से उत्पादित उत्पादों हेतु प्रत्येक गुरुवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन कृषि उपज मंडी शनवारा में किया जाता है। इस हाट बाजार में जिले के किसान अपनी ताजी एवं प्राकृतिक उपज को उचित मूल्य पर विक्रय हेतु लाते है। यहां उपलब्ध उत्पादों में फल, सब्जियां एवं अन्य कृषि उत्पाद शामिल रहते हैं, जिन्हें किसान बिना किसी बिचौलिये के सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं।

स्थानीय स्तर पर किसानों को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी ताजे एवं शुद्ध उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं। पौष्टिक एवं सुरक्षित उत्पाद प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज, दालें, फल और सब्जियां अधिक पौष्टिक और सुरक्षित होती हैं। किसान इन्हें कम लागत में अपने खेत पर ही तैयार कर सकते हैं। विभाग द्वारा किसानों से अधिक से अधिक संख्या में प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की जा रही है, ताकि सतत और सुरक्षित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके। यह पहल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

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