राज्य कृषि समाचार (State News)

नरवाई जलाने पर छिंदवाड़ा जिले में 14 एफआईआर दर्ज    

18 अप्रैल 2026, छिंदवाड़ानरवाई जलाने पर छिंदवाड़ा जिले में 14 एफआईआर दर्ज – छिंदवाड़ा जिले में गेहूं कटाई का कार्य तेजी से जारी है। कटाई के बाद खेतों में बचे डंठल (नरवाई) के उचित प्रबंधन के लिए कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

उप संचालक कृषि श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नरवाई जलाने से खेतों के मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं तथा भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है, जिससे आगामी फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में शासन द्वारा भी किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। जिले की प्रत्येक पंचायत में गठित टीमों द्वारा चौपाल एवं संगोष्ठियों का आयोजन कर किसानों को नरवाई न जलाने की शपथ दिलाई जा रही है तथा मुनादी के माध्यम से भी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। साथ ही नरवाई जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी भी दी जा रही है।

किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए स्ट्रा रीपर, सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग हेतु प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा डी कंपोजर के उपयोग से फसल अवशेषों को खाद में बदलने के उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।

नरवाई जलाने की घटनाओं पर निगरानी के लिए कृषि एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल सक्रिय हैं। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच और कार्रवाई की जा रही है। पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी एवं ग्राम पंचायत सचिव की टीम द्वारा पंचनामा तैयार कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा रहा है। जिले में अब तक सेटेलाइट के माध्यम से नरवाई जलाने की कुल 497 घटनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें से विकासखंड अमरवाड़ा में 6, चौरई में 3, बिछुआ में 4 और परासिया में 1 मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही बिछुआ एवं छिंदवाड़ा विकासखंड में एक-एक किसान पर जुर्माना भी लगाया गया है।

      कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन एवं उप संचालक कृषि श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं और खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि मल्चर एवं रोटावेटर के माध्यम से फसल अवशेषों को खाद में परिवर्तित किया जा सकता है। साथ ही सभी कम्बाइन हार्वेस्टर में स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। कटाई के बाद सुपर सीडर के माध्यम से जायद फसलों की बोवनी कर नरवाई जलाने की घटनाओं को रोका जा सकता है।

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