खरगोन जिले में स्थापित होंगे 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर
25 अगस्त 2026, खरगोन: खरगोन जिले में स्थापित होंगे 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर – भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) स्थापित किए जाएंगे। जिले में गठित 15 प्राकृतिक खेती क्लस्टरों में प्रत्येक दो क्लस्टर पर एक बीआरसी स्थापित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक विभिन्न जैव-इनपुट स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
उप संचालक कृषि श्री शिव सिंह राजपूत ने बताया कि बीआरसी की स्थापना के लिए स्थानीय कृषि उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों तथा प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदक निर्धारित प्रारूप में 10 सितंबर 2026 को शाम 6 बजे तक संबंधित विकासखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) अथवा परियोजना संचालक आत्मा कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
इन विकासखंडों में स्थापित होंगे बीआरसी – जिले में विकासखंड खरगोन में 2 तथा सेगांव , गोगावां, भीकनगांव, भगवानपुरा, झिरन्या, कसरावद, महेश्वर और बड़वाह में 1-1 बीआरसी स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों से किसानों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाली जैविक सामग्री स्थानीय स्तर पर समय पर उपलब्ध हो सकेगी।
आवेदन के साथ प्रस्तुत करने होंगे आवश्यक दस्तावेज – आवेदन के साथ संस्था का पंजीयन प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सदस्यों की सूची तथा कम से कम दो वर्ष की विस्तृत प्राकृतिक खेती व्यवसाय योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। बिजनेस प्लान में केंद्र का प्रस्तावित स्थान, क्षेत्र की कृषि स्थिति, सेवा क्षेत्र का बाजार विश्लेषण, जागरूकता एवं विपणन रणनीति, जैव-इनपुट उत्पादन एवं विक्रय योजना तथा कच्चे माल की उपलब्धता एवं सोर्सिंग का विवरण शामिल करना होगा।
बीआरसी के संचालन के लिए पशुधन अथवा पौधों पर आधारित बायोमास जैसे आवश्यक कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता भी जरूरी होगी। यदि गोबर एवं गौमूत्र की उपलब्धता स्वयं के माध्यम से नहीं है तो पांच किलोमीटर की परिधि में स्थित गौशालाओं से इसकी व्यवस्था का विवरण आवेदन में देना होगा। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन, प्राथमिक सेवा सहकारी समिति, गौशाला, ग्राम पंचायत अथवा अन्य सामुदायिक संस्थाओं से सहयोग की जानकारी भी प्रस्तुत करनी होगी।
कृषि विभाग ने बताया कि पात्र संस्थाओं के अभाव में संबंधित क्लस्टर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती से जुड़े कृषि उद्यमियों का चयन किया जाएगा। जिले में बीआरसी की स्थापना से किसानों को जैव-इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा और जिले में प्राकृतिक कृषि व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
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