राज्य कृषि समाचार (State News)

देश में पर्यावरण अनुकूल उर्वरकों की जरूरत : श्री गौड़ा

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एफएआई का वार्षिक सम्मेलन

नई दिल्ली। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री डीवी सदानंद गौड़ा ने गत दिनों नई दिल्ली में फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के वार्षिक सेमिनार के समापन सत्र में ‘उर्वरक क्षेत्र के लिए नया दृष्टिकोण विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद, एफएआई के चेयरमैन श्री के. एस. राजू, एफएआई के महानिदेशक श्री सतीश चंदर और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
उर्वरक के घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भरता की जरूरत के बारे में श्री सदानंद गौड़ा ने कहा कि भारत 130 करोड़ लोगों का देश है। हमारी जनसंख्या 2040 तक 150 करोड़ हो जाएगी। इतनी बड़ी आबादी की खाद्य सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उर्वरक कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भरता आवश्यक है। उर्वरक उद्योग के साथ सरकार का संबंध विशेष प्रकार का है क्योंकि खाद्य सुरक्षा के लिए उद्योग के समर्थन की जरूरत है।
श्री गौड़ा ने कहा कि उर्वरकों की नई किस्मों को विकसित किया जाना चाहिए। नई किस्में पारंपरिक उर्वरकों से ज्यादा प्रभावी होनी चाहिए तथा पर्यावरण अनुकूल भी होना चाहिए। उन्होंने नए किस्म के उर्वरक को विकसित करने के संबंध में इफको के प्रयासों का जिक्र किया। इस नए किस्म के उर्वरक को ‘नैनो फर्टिलाइजरÓ का नाम दिया गया है। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ये उर्वरक न केवल अधिक प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल होंगे, बल्कि इससे सरकार के सब्सिडी बोझ को भी कम करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि मिट्टी के जैविक तत्व को बनाए रखने के लिए उर्वरकों के साथ जैविक खाद का भी प्रयोग किया जाना चहिए।

खरीफ में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति

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