राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

क्या है 5659 करोड़ का कपास मिशन? जानिए कैसे किसानों की पैदावार और आमदनी दोनों बढ़ेगी  

08 मई 2026, नई दिल्ली: क्या है 5659 करोड़ का कपास मिशन? जानिए कैसे किसानों की पैदावार और आमदनी दोनों बढ़ेगी – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के कपास क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 5659.22 करोड़ रुपये के कपास उत्पादकता मिशन (2026-27 से 2030-31) को मंजूरी दी है। यह मिशन कपास उत्पादन में आ रही बाधाओं, घटती उत्पादकता और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह मिशन भारत सरकार के 5F विजन—फार्म, फाइबर, फैक्ट्री, फैशन और फॉरेन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य कपास की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना और किसानों से लेकर उद्योग तक एक सशक्त प्रणाली तैयार करना है।

मिशन का क्रियान्वयन और संस्थागत ढांचा

इस मिशन का कार्यान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के10 संस्थान, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) का एक संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAU) के तहत अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) के 10 केंद्र शामिल होंगे।

शुरुआत में यह मिशन 14 राज्यों के 140 जिलों पर केंद्रित रहेगा, जहां तकनीक के विस्तार के साथ करीब 2000 जिनिंग और प्रोसेसिंग कारखानों की स्थापना की जाएगी।

किसानों के लिए क्या होगा मुख्य फायदा?

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अधिक उपज देने वाले, जलवायु प्रतिरोधी और कीट प्रतिरोधी बीजों का विकास करना है। इसके साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों को लागू करना, किसानों को प्रशिक्षण देना, गुणवत्ता सुधारना और कपास मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना शामिल है। सरकार का लक्ष्य है कि कपास उत्पादन को वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से बढ़ाया जाए, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा हो सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें।

उत्पादन लक्ष्य और बड़े बदलाव

मिशन के तहत कपास की उत्पादकता को 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे वर्ष 2031 तक लगभग 498 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) कपास उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इससे लगभग 32 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कपास क्षेत्र में बड़ी आर्थिक मजबूती आएगी।

कस्तूरी कॉटन और नए फाइबर पर फोकस

मिशन के तहत कस्तूरी कॉटन भारत पहल को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भारतीय कपास की पहचान और प्रमाणीकरण मजबूत होगा। साथ ही अपशिष्ट को 2 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा अलसी, रामी, सिसल, मिल्कवीड, बांस और केले जैसे प्राकृतिक रेशों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ वस्त्र उत्पादन को बल मिलेगा।

आत्मनिर्भर कपास क्षेत्र की दिशा में कदम

यह मिशन न केवल उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित है, बल्कि कपास क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने, गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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