VB–G RAM G विधेयक, 2025 को संसद की मंज़ूरी: ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था में 10 बड़े बदलाव
22 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: VB–G RAM G विधेयक, 2025 को संसद की मंज़ूरी: ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था में 10 बड़े बदलाव – ग्रामीण भारत के लिए रोज़गार से जुड़ी नीति में बड़ा मोड़ आने वाला है। संसद ने विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 को मंज़ूरी दे दी है। यह विधेयक मौजूदा ग्रामीण रोज़गार व्यवस्था को नए सिरे से ढालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ़ किया है कि विधेयक को अभी लागू नहीं किया गया है और इसके लिए अधिसूचना जारी होना बाकी है।
सरकार का तर्क है कि बीते वर्षों में ग्रामीण इलाकों की ज़रूरतें बदली हैं—खेती की लागत बढ़ी है, मौसम का मिज़ाज अनिश्चित हुआ है और गांवों में टिकाऊ रोज़गार की मांग तेज़ हुई है। ऐसे में केवल मज़दूरी आधारित रोज़गार के बजाय एक ऐसा ढांचा चाहिए, जो रोज़गार के साथ-साथ गांवों में उपयोगी संपत्तियाँ भी तैयार करे।
रोज़गार की गारंटी और खेती का संतुलन
विधेयक का सबसे बड़ा बदलाव रोज़गार के दिनों से जुड़ा है। इसके तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का गारंटीकृत रोज़गार देने का प्रस्ताव है, जो अब तक 100 दिन था। अगर किसी परिवार को काम मांगने के 15 दिन के भीतर रोज़गार नहीं मिलता, तो राज्य सरकार को बेरोज़गारी भत्ता देना होगा।
साथ ही, खेती से जुड़े एक अहम मुद्दे को भी इसमें जगह दी गई है। राज्यों को अधिकार दिया गया है कि वे बुआई और कटाई के समय साल में कुल 60 दिन तक योजना के तहत काम न कराने का निर्णय ले सकें। सरकार का कहना है कि इससे खेती के मौसम में खेतों के लिए मज़दूरों की कमी नहीं होगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
पंचायत से योजना, राष्ट्रीय स्तर तक ढांचा
इस विधेयक में योजना बनाने की प्रक्रिया को पूरी तरह नीचे से ऊपर ले जाने की बात कही गई है। हर काम की शुरुआत ग्राम पंचायत से होगी। पंचायत स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर अपनी योजना बनाएगी, जिन्हें ब्लॉक, ज़िला और राज्य स्तर पर जोड़ा जाएगा। इन सभी योजनाओं को मिलाकर एक साझा राष्ट्रीय ग्रामीण ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि अलग-अलग विभागों के कामों में तालमेल बने और दोहराव से बचा जा सके।
कामों का फोकस चार मुख्य क्षेत्रों पर रहेगा—जल संरक्षण और सिंचाई, ग्रामीण सड़कें और सार्वजनिक भवन जैसे बुनियादी ढांचे, खेती-पशुपालन से जुड़ी आजीविका सुविधाएँ और बाढ़-सूखा जैसी आपदाओं से निपटने के उपाय। सरकार का दावा है कि इससे गांवों में केवल अस्थायी रोज़गार नहीं, बल्कि लंबे समय तक काम आने वाली संपत्तियाँ बनेंगी।
निगरानी, पारदर्शिता और खर्च
विधेयक में निगरानी व्यवस्था को कड़ा करने का प्रस्ताव है। मज़दूरों की हाज़िरी, काम की प्रगति और भुगतान की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी और सार्वजनिक की जाएगी। ग्राम सभा द्वारा सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य रहेगा और शिकायतों के समाधान के लिए तय समयसीमा तय की गई है।
सरकारी आकलन के अनुसार, इस नई व्यवस्था पर सालाना करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी होगी। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों को केंद्र से अधिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है, जबकि अतिरिक्त खर्च की ज़िम्मेदारी राज्यों पर होगी।
VB–G RAM G विधेयक, 2025: 10 बड़े बदलाव एक नज़र में
- ग्रामीण परिवारों के लिए रोज़गार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन।
- 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोज़गारी भत्ता अनिवार्य।
- खेती के पीक सीज़न में 60 दिन तक योजना कार्य रोकने का अधिकार राज्यों को।
- सभी कार्यों की योजना ग्राम पंचायत स्तर से तय होगी।
- पंचायत से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक साझा ग्रामीण ढांचा तैयार होगा।
- जल संरक्षण, ढांचा, आजीविका और आपदा प्रबंधन पर प्राथमिकता।
- मज़दूरों की हाज़िरी और भुगतान की डिजिटल व्यवस्था।
- ग्राम सभा द्वारा सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य।
- मौजूदा ग्रामीण रोज़गार कानून की जगह नई व्यवस्था का प्रस्ताव।
- सालाना लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान।
संसद की मंज़ूरी के साथ यह साफ़ है कि सरकार ग्रामीण रोज़गार नीति को नई दिशा देना चाहती है। लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि इस विधेयक का असली असर तब सामने आएगा, जब इसे ज़मीन पर लागू किया जाएगा और पंचायतों से लेकर राज्यों तक इसकी क्षमता की परीक्षा होगी।
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