वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जलवायु-सहिष्णु कृषि को सशक्त बनाने हेतु अमेरिकी सरकार ने CIMMYT को 40 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया
22 फरवरी 2026, नई दिल्ली: वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जलवायु-सहिष्णु कृषि को सशक्त बनाने हेतु अमेरिकी सरकार ने CIMMYT को 40 मिलियन डॉलर का अनुदान दिया – अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूँ सुधार केंद्र (CIMMYT) को अमेरिकी सरकार से 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर का महत्वपूर्ण अनुदान प्राप्त हुआ है, जिसका उद्देश्य वैश्विक खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, कृषि प्रणालियों की जलवायु-सहिष्णुता बढ़ाना तथा खुले वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाना है।
इस वित्तीय सहयोग की घोषणा अमेरिकी सरकार के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान की गई। यह अनुदान संयुक्त राज्य अमेरिका और CIMMYT के बीच उस दीर्घकालिक साझेदारी का विस्तार है, जो विज्ञान आधारित कृषि समाधानों के माध्यम से विश्वभर के किसानों, बाजारों और खाद्य प्रणालियों को सशक्त बनाने पर केंद्रित रही है।
पिछले 80 वर्षों से अधिक समय से संयुक्त राज्य अमेरिका और मेक्सिको—निजी परोपकारी संस्थाओं तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से—ऐसे कृषि अनुसंधान का समर्थन करते रहे हैं, जिसने वैश्विक खाद्य उत्पादन में ऐतिहासिक परिवर्तन लाया। यह नया निवेश उसी विरासत को आगे बढ़ाता है और इस साझा समझ को रेखांकित करता है कि मजबूत और लचीली खाद्य प्रणालियाँ आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
CIMMYT के महानिदेशक ब्रैम गोवार्ट्स ने कहा, “यह अनुदान विज्ञान, विश्वास और साझा उद्देश्य पर आधारित हमारी दीर्घकालिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है। खाद्य सुरक्षा और लचीली कृषि प्रणालियाँ वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए अनिवार्य हैं। हमें गर्व है कि हम अमेरिका और विश्वभर के अपने साझेदारों के साथ मिलकर किसानों को नवाचार, तकनीक और ज्ञान उपलब्ध कराने का कार्य जारी रखेंगे।”
एशिया क्षेत्र के लिए इस निवेश के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बी. एम. प्रसन्ना, प्रबंध निदेशक, बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) तथा CIMMYT के एशिया क्षेत्रीय निदेशक, ने कहा, “2026 में अमेरिकी सरकार का यह नया निवेश वैश्विक खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को गति देगा, जो खाद्य प्रणालियों को सुदृढ़ करेंगी और विश्वभर, विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में, छोटे किसानों की आजीविका में सुधार लाएँगी। हम इसे भारत और नेपाल में कृषि अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश को प्रेरित करने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में भी देखते हैं।”
CIMMYT के अनुसार यह वित्तपोषण उसके अनुसंधान कार्यक्रमों के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुदृढ़ करेगा। इसमें सूखा और अधिक तापमान सहन करने वाली मक्का एवं गेहूँ की उन्नत किस्मों का विकास, महत्वपूर्ण आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण और उपयोग, डिजिटल एवं डेटा-आधारित कृषि उपकरणों का विस्तार, तथा उभरते कीटों और रोगों से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रारंभिक चेतावनी और वैश्विक निगरानी प्रणालियों को मजबूत करना शामिल है।
इन पहलों से किसानों को सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन करने, जलवायु झटकों के जोखिम को कम करने और कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने में सहायता मिलेगी, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता को भी बल मिलेगा।
एक वैश्विक और गैर-राजनीतिक संस्था के रूप में CIMMYT अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ओशिनिया सहित अनेक देशों की सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और विकास भागीदारों के साथ मिलकर कार्य करता है। विविध साझेदारियाँ इसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता—किसानों की आजीविका सुधारने, टिकाऊ कृषि प्रणालियाँ विकसित करने और समावेशी खाद्य प्रणालियों का निर्माण करने—का आधार हैं।
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