ICAR-IARI में दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ड्रिप सिंचाई और हाइड्रोपोनिक्स पर दिया जोर
14 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: ICAR-IARI में दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ड्रिप सिंचाई और हाइड्रोपोनिक्स पर दिया जोर – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को जल-कुशल कृषि पद्धतियां अपनाने की सलाह दी। उन्होंने खेती में पानी की बचत, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण और हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। वे नई दिल्ली स्थित भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) में आयोजित दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में मध्य प्रदेश के किसानों से संवाद कर रहे थे। इस कार्यक्रम में विदिशा, रायसेन और सीहोर जिले के किसानों ने भाग लिया।
जल प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी
‘उच्च जल उत्पादकता के लिए सूक्ष्म सिंचाई पर विशेष जोर के साथ उन्नत जल प्रबंधन तकनीक’ विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश के कृषि रोड मैप के तहत जल प्रौद्योगिकी केंद्र (WTC), ICAR-IARI ने किया। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत जल प्रबंधन तकनीकों की जानकारी देना और खेती में पानी के बेहतर उपयोग के लिए इन तकनीकों को अपनाने के प्रति प्रोत्साहित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाली स्वचालित बेसिन सिंचाई, मल्चिंग के साथ एकीकृत ड्रिप सिंचाई और उप-सतही ड्रिप प्रणाली के बारे में बताया गया। इसके अलावा औषधीय पौधों और ड्रैगन फ्रूट की खेती में स्वचालित ड्रिप फर्टिगेशन, सिंचाई का सही समय निर्धारित करने की तकनीकों, प्राकृतिक खेती के तहत फूलों की फसलों में जल प्रबंधन, वर्षा जल संरक्षण और जल गुणवत्ता प्रबंधन की जानकारी भी दी गई।
धान, सोयाबीन और गेहूं की खेती में जल दक्षता पर जोर
प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने धान, सोयाबीन, गेहूं, चना और सब्जियों की खेती में पानी का कुशल उपयोग करने वाली किस्मों और कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इन तकनीकों का उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए फसल उत्पादन और जल-उपयोग दक्षता में सुधार करना है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से संवाद के दौरान जल-कुशल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। सूक्ष्म सिंचाई और फसल विविधीकरण के साथ हाइड्रोपोनिक्स जैसी तकनीकें भी खेती में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग का किया अवलोकन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत किसानों को संस्थान में विकसित विभिन्न कृषि तकनीकों और सुविधाओं का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने हाइड्रोपोनिक्स, एक्वापोनिक्स, वर्टिकल फार्मिंग, पॉलीहाउस खेती और एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) के मॉडल देखे। इसके अलावा किसानों को एग्रीवोल्टाइक्स, स्वचालित सिंचाई प्रणालियों, अमृत सरोवर, बीज उत्पादन और उन्नत कृषि उपकरणों से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी दी गई। इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया गया।
कृषि वैज्ञानिकों ने भी लिया भाग
कार्यक्रम में भाकृअनुप के उप महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. राजबीर सिंह, ICAR-IARI के निदेशक डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, भाकृअनुप के सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. आर.आर. बर्मन, ICAR-IARI के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डॉ. आर.एन. पडारिया और जल प्रौद्योगिकी केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद सहित संस्थान के वैज्ञानिक और कर्मचारी मौजूद रहे।
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