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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

Rajasthan: राजस्थान में हो पृथक कृषि अभियांत्रिकी विभाग : डॉ. झा

26 फरवरी 2024, नई दिल्ली: राजस्थान में हो पृथक कृषि अभियांत्रिकी विभाग : डॉ. झा – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. एस. एन. झा ने कृषि संरचना एवं पर्यावरण प्रबंधन में प्लास्टिक के अभियांत्रिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 19वीं दो दिनों से वार्षिक कार्यशाला पर अपने अध्यक्ष उद्बोधन में कहा कि राजस्थान में कृषि अभियंताओं ने जल ग्रहण विभाग में काफी अच्छे काम किये हैं, जिसे राजस्थान के किसानो को बहुत फायदा हुआ है। राजस्थान में कृषि यंत्रीकरण पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा, राजस्थान सरकार को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान में विश्व भर में कृषि उत्पादन के संस्करण एवं प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है, राजस्थान में भी कृषि उत्पाद के प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया जाकर किसानों के आय में वृद्धि की जा सकती है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए हमें 75% फॉर्म को मैकेनाइज करना होगा क्योंकि भविष्य में यूवा कृषि कार्य करने के लिए कम उपलब्ध रहेंगे। राजस्थान के किसानों का भविष्य सुधारने एवं किसानों की आय बढ़ाने हेतु राजस्थान सरकार से अनुरोध है कि राजस्थान के किसानों की खेती को आसन एवं प्रॉफिटेबल बनाने एवं भविष्य में सबसे आगे रहने के लिए राजस्थान में पृथक से कृषि अभियांत्रिकी विभाग हो जो डायरेक्ट कृषि अभियांत्रिकी के अंतर्गत हो।

कार्यशाला का आयोजन एमपीयूएटी उदयपुर एवं सीफेट, लुधियाना के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है कार्यशाला में परियोजना के राष्ट्र भर में 14 केंद्र अपनी वर्ष भर का प्रतिवेदन प्रस्तुत किए। कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ अजीत कुमार कर्नाटक कुलपति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर ने बताया कि प्लास्टिक का विवेकपूर्ण उपयोग कृषि के क्षेत्र में वरदान सिद्ध हो रहा है निश्चित ही प्लास्टिक का पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव रहता है परंतु इसका विवेक पूर्ण उपयोग अन्य पदार्थों का एक सस्ते विकल्प के रूप में अपनी पहचान पूरे विश्व में बन चुका

डॉ के नरसिया अतिरिक्त निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने वैज्ञानिकों से तकनीकी नवाचार करने एवं उसके आर्थिक पक्ष को संज्ञान में रखते हुए लागत कम करने आह्वान किया। डॉक्टर नचिकेत कोतवालीवाले, निर्देशक सीफेट, लुधियाना ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि जन मानस में प्लास्टिक को लेकर काफी भ्रांतियां हैं जबकि विवेकपूर्ण व जिम्मेदारी पूर्वक उपयोग प्लास्टिक की उपयोगिता बढ़ता है । डॉ नचिकेत ने वैज्ञानिकों को बहुआयामी अनुसंधान कार्यों को एक छत के नीचे लाकर सामूहिक प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। कार्यालय में डॉ राकेश शारदा, परियोजना समन्वयक सीफैट, लुधियाना ने परियोजना का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने नई तकनीकियों की जानकारी दी। कार्यशाला में टी . बी.एस राजपूत पूर्व परियोजना निदेशक, भारतीय जल प्रबंधन संस्थान, न्यू दिल्ली एवं इंजीनियर आनंद झांबरे, कार्यकारी निदेशक, एनसीपीएएच, नई दिल्ली विशेषज्ञ के रूप में भाग ले रहे हैं जो की नई परियोजनाओं एवं वार्षिक प्रतिवेदन की समीक्षा करेंगे। डॉ अरविंद वर्मा अनुसंधान निदेशक महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर ने अतिथियों का स्वागत किया एवं उदयपुर केंद्र की वर्षभर की उपलब्धियां का संक्षिप्त विवरण दिया साथ ही डॉक्टर वर्मा ने प्लास्टिक का कृषि में संभावित उपयोगो पर चर्चा की। डॉ पीके सिंह अधिष्ठाता, प्रौद्योगिकी एवम अभियांत्रिकी महाविद्यालय उदयपुर ने विश्व भर में जल संरक्षण में प्लास्टिक लाइनिंग व अन्य प्लास्टिक उपकरणों का महत्व बताया ।

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