कपास बेचने का तरीका बदला, अब मोबाइल से स्लॉट बुकिंग से लेकर भुगतान तक आसान हुई पूरी प्रक्रिया
06 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: कपास बेचने का तरीका बदला, अब मोबाइल से स्लॉट बुकिंग से लेकर भुगतान तक आसान हुई पूरी प्रक्रिया – कपास किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में भारतीय कपास निगम (CCI) ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। अब कपास खरीद से जुड़े कई जरूरी काम डिजिटल माध्यम से किए जा रहे हैं। किसान पंजीकरण से लेकर स्लॉट बुकिंग, खरीद संबंधी जानकारी और आधार-सक्षम भुगतान तक की प्रक्रिया को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारतीय कपास निगम (CCI) लिमिटेड की ओर से इन सुधारों को तेलंगाना के हैदराबाद में 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम में प्रस्तुत किया जाएगा। यह कार्यक्रम ‘सुधार उत्सव 2026’ के तहत आयोजित किया जा रहा है।
किसान पंजीकरण से भुगतान तक डिजिटल व्यवस्था
CCI ने कपास खरीद व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाते हुए कपास किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए कपास खरीद के अलग-अलग चरणों को एक साथ जोड़ा गया है। इसमें किसान पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग, खरीद से संबंधित संचार और आधार-सक्षम भुगतान जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करना और किसानों को अपनी कपास बिक्री से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है। डिजिटल व्यवस्था से किसानों और CCI के बीच इंटरफेस को बेहतर बनाने के साथ-साथ जिनर्स और वस्त्र उद्योग के साथ भी खरीद प्रक्रिया को अधिक सहज बनाने का प्रयास किया गया है।
6 अक्टूबर को हैदराबाद में दिखेगा नया मॉडल
‘सुधार उत्सव 2026’ के तहत आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, तेलंगाना सरकार के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, किसान, उद्योग संघ और कपास एवं वस्त्र क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य जमीनी स्तर पर किए गए सुधारों के प्रभाव को सामने लाना और कपास मूल्य श्रृंखला से जुड़े प्रमुख हितधारकों के बीच अनुभव साझा करने का अवसर देना है। कार्यक्रम में CCI के प्रमुख सुधारों और पहलों पर प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद एक लघु फिल्म के माध्यम से इन सुधारों के कार्यान्वयन और उनके प्रभाव को दिखाया जाएगा।
डिजिटल तकनीक से बदली पारंपरिक खरीद व्यवस्था
CCI ने पिछले कुछ वर्षों में कपास खरीद, किसान पंजीकरण, डिजिटल स्लॉट बुकिंग, प्रत्यक्ष भुगतान, गुणवत्ता मूल्यांकन, उत्पाद की पहचान और ट्रैकिंग, कपास की बिक्री और हितधारकों से जुड़ाव के क्षेत्र में कई तकनीक आधारित और संस्थागत सुधार किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य व्यापार करने में आसानी बढ़ाना, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करना और कपास किसानों तक सेवाओं की अधिक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।
कस्तूरी कॉटन भारत पर भी जोर
कार्यक्रम में भारतीय कपास की गुणवत्ता और उसकी पहचान को बेहतर बनाने के लिए CCI की ओर से किए जा रहे प्रयासों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें कस्तूरी कॉटन भारत पहल के तहत संदूषण नियंत्रण, डिजिटल पहचान और प्रीमियम गुणवत्ता वाले कपास को बढ़ावा देने से जुड़ी पहल शामिल हैं। इन उपायों का उद्देश्य भारतीय कपास की पहचान, गुणवत्ता और बाजार स्थिति को मजबूत करना है। साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कपास की स्वीकार्यता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम को बढ़ावा
प्रदर्शन कार्यक्रम में उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS) और कृषि से जुड़े संस्थानों के सहयोग से बढ़ावा दिए जा रहे अन्य उत्पादकता-अनुकूल उपायों पर भी चर्चा होगी। इन पहलों का उद्देश्य भारतीय कपास में उत्पादकता के अंतर को कम करना और किसानों को कृषि स्तर पर बेहतर लाभ दिलाने के साथ भारतीय कपास क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है।
किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों के अनुभव भी होंगे साझा
कार्यक्रम में कपास किसानों और उद्योग से जुड़े हितधारकों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलेगा। इसके जरिए उन लोगों से सीधे जानकारी सामने आएगी, जो इन सुधारों में भागीदार रहे हैं या इनसे लाभान्वित हुए हैं। चर्चा में कपास की गुणवत्ता में सुधार, HDPS, कस्तूरी कॉटन भारत, कपास खरीद के डिजिटलीकरण और कपास मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने से जुड़े अन्य उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
रेशम क्षेत्र में भी डिजिटल सुधार
वस्त्र मंत्रालय के तहत केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) भी डिजिटल सेवा वितरण, मिशन-मोड तकनीक हस्तांतरण और नए जनसंपर्क माध्यमों के जरिए रेशम उत्पादन क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ा रहा है। भारतीय रेशम गुणवत्ता संगठन (SMOI) वर्ष 2004 से रेशम गुणवत्ता योजना लागू कर रहा है और सिल्क मार्क के माध्यम से शुद्ध रेशम की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने का काम करता है। वर्ष 2022-23 से SMOI ने पंजीकरण, नवीनीकरण, दस्तावेज प्रक्रिया, पूर्व-निरीक्षण, भुगतान, लेबल इंडेंट जारी करने, रिकॉर्ड प्रबंधन और शिकायत निवारण जैसी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल किया है।
यह व्यवस्था अब 7,000 से अधिक अधिकृत उपयोगकर्ताओं को सेवा दे रही है और हर साल 500 से अधिक नए नामांकन होते हैं। निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करने वाले आवेदन सामान्य तौर पर 1 से 2 कार्य दिवस में प्रोसेस किए जा सकते हैं। इससे कागजी कार्रवाई और संबंधित यात्राओं को कम करने के साथ पारदर्शिता, ट्रैकिंग और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में मदद मिली है।
75 हजार किसानों तक पहुंचा ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’
केंद्रीय रेशम बोर्ड ने वर्ष 2025 के दौरान 100 दिवसीय ‘मेरा रेशम मेरा अभियान (MRMA) 1.0’ शुरू किया। इसका उद्देश्य रेशम उत्पादन की प्रमाणित तकनीकों को ‘प्रयोगशाला से भूमि तक’ पहुंचाना था। यह अभियान 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 129 जिलों में चलाया गया। इसके तहत 1,400 से अधिक कार्यक्रमों के जरिए 75,000 किसानों तक पहुंच बनाई गई। MRMA 1.0 से मिले अनुभव के आधार पर MRMA 2.0 को अधिक व्यवस्थित अभियान के रूप में तैयार किया गया। इसमें 218 प्रमुख रेशम उत्पादन जिले शामिल किए गए हैं, जो देश के कच्चे रेशम उत्पादन में 95 प्रतिशत से अधिक योगदान करते हैं।
इसके तहत आधारभूत सर्वेक्षण, हितधारक परामर्श, जिला रेशम उत्पादन विकास योजनाएं और जरूरत के अनुसार कार्य योजनाओं को शामिल किया गया है। अभियान के तहत 1,700 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए 73,000 से अधिक किसानों और करीब एक लाख हितधारकों तक सीधे पहुंच बनाई गई है।
सेरी-पर्यटन के जरिए रेशम उत्पादन को बढ़ावा
केंद्रीय रेशम बोर्ड ने रेशम उत्पादन, पर्यटन, शिक्षा और स्थानीय आर्थिक विकास को जोड़ने के लिए सेरी-पर्यटन की अवधारणा भी विकसित की है।इसके तहत संग्रहालयों, लाइव प्रदर्शन, होस्ट प्लांट और कीट पार्क, तकनीकी प्रदर्शन और उत्पाद दुकानों के जरिए ‘मिट्टी से रेशम’ तक की पूरी प्रक्रिया को दिखाने की योजना है।
CSB-P-4 बेसिक सीड फार्म, मानसबल, जम्मू-कश्मीर और CSB-Eri बेसिक सीड फार्म, टोपाटोली, असम को सेरी-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां रेशम की विविधता, जर्मप्लाज्म संरक्षण, रेशमकीट पालन, कोकून उत्पादन, रीलिंग, बुनाई, रंगाई और सिल्क मार्क के प्रति जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां दिखाई जाएंगी।
खेत से फाइबर और फैशन तक मजबूत मूल्य श्रृंखला
वस्त्र मंत्रालय की ओर से किए जा रहे इन सुधारों का उद्देश्य आधुनिक, तकनीक आधारित और हितधारक-केंद्रित वस्त्र व्यवस्था तैयार करना है। इसमें सेवाओं को डिजिटल बनाने, तकनीक को किसानों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाने तथा भारत की रेशम और कपास विरासत को नए अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। ‘सुधार उत्सव 2026’ के तहत इन सुधारों का प्रदर्शन वस्त्र मंत्रालय की उस व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें एक मजबूत और एकीकृत वस्त्र मूल्य श्रृंखला तैयार करने पर जोर है—खेत से फाइबर तक, फाइबर से फैक्टरी तक, फैक्टरी से फैशन तक और फैशन से विदेशी बाजार तक।
हैदराबाद में होने वाला कार्यक्रम किसानों, उद्योग, सरकारी एजेंसियों और ज्ञान संस्थानों के बीच भागीदारी और सहयोग को बढ़ावा देने के साथ नीति और संस्थागत सुधारों को जमीनी स्तर के परिणामों से जोड़ने का मंच प्रदान करेगा। इन सुधारों के जरिए CCI कपास अर्थव्यवस्था में अपनी संस्थागत भूमिका को मजबूत करने, किसानों को समर्थन देने, खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने, गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देने और अधिक पारदर्शी, कुशल, टिकाऊ तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कपास एवं वस्त्र क्षेत्र के निर्माण में योगदान देने की दिशा में काम कर रहा है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


