राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत सरकार तंबाकू की खेती को हतोत्साहित कर लाभकारी वैकल्पिक फसलों को दे रही बढ़ावा: शिवराज सिंह चौहान

17 मार्च 2026, नई दिल्ली: भारत सरकार तंबाकू की खेती को हतोत्साहित कर लाभकारी वैकल्पिक फसलों को दे रही बढ़ावा: शिवराज सिंह चौहान – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने लोक सभा में कहा कि भारत सरकार किसानों की आय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों को हतोत्साहित करते हुए लाभकारी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल तंबाकू उत्पादन कम करना नहीं, बल्कि किसानों की आय को सुरक्षित और स्थिर बनाना भी है।

लोक सभा में सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौहान ने बताया कि जिन क्षेत्रों में तंबाकू की खेती की जाती है, वहां किसानों के लिए कई लाभकारी विकल्प चिन्हित किए गए हैं। इनमें संकर मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, जो किसानों को बेहतर नकदी आमदनी प्रदान कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि देश में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से हैं, जिनके लिए केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इस चुनौती को देखते हुए सरकार ने एकीकृत खेती के विभिन्न मॉडल तैयार किए हैं और कई राज्यों में इनके प्रदर्शन भी शुरू किए गए हैं। इन मॉडलों के तहत किसान अनाज, सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को एक साथ अपनाकर पूरे वर्ष नियमित और बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए गेहूं, धान, दलहन और तिलहन सहित सभी प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई है और वर्तमान सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अरहर, मसूर और उड़द जैसी दलहनी फसलों के लिए यह व्यवस्था की गई है कि पंजीकृत किसान जितनी मात्रा बिक्री के लिए लाएंगे, सरकार उसे पूरी तरह खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है।

फसल बीमा योजना में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा मिलने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव के बाद यदि किसी एक किसान की फसल को भी नुकसान होता है तो उसे बीमा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि उपज के आंकड़े आने के 21 दिनों के भीतर यदि मुआवजा किसानों के खाते में नहीं पहुंचता है, तो बीमा कंपनियों और राज्यों को 12 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” के संकल्प के अनुरूप कृषि योजनाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि रक्षक पोर्टल सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितताएं पाई जाती हैं, वहां कड़ी कार्रवाई की जाती है। साथ ही, कई राज्यों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से किसानों के खातों में फसल बीमा की बड़ी राशि सीधे जमा कराई गई है, जो सरकार की किसान हितों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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