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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पूर्वोत्तर के समग्र कृषि विकास में आईएआरआई एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बनकर उभरेगा : कृषि मंत्री श्री मुंडा

05 मार्च 2024, नई दिल्ली: पूर्वोत्तर के समग्र कृषि विकास में आईएआरआई एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बनकर उभरेगा : कृषि मंत्री श्री मुंडा – केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को आईएआरआई, दिरपई चापोरी, गोगामुख, असम में प्रशासनिक-सह-शैक्षणिक भवन, मानस गेस्ट हाउस, सुबनसिरी गर्ल्स हॉस्टल और ब्रह्मपुत्र बॉयज हॉस्टल का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, असम में प्रदर्शनी स्टाल का दौरा किया।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को दिया एक नया आयाम

केन्द्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि के विकास की कमियों को दूर कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया है। इस क्रम में  प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है, जिसमें कृषि की भूमिका बेहद अहम है।

तिलहन का आने वाले दिनों में हम आयात नहीं बल्कि निर्यात करेंगेः श्री मुंडा 

श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि खाद्य तेल आयात का बोझ कम करने और तिलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए 11 हजार करोड़ रुपये का मिशन चलाया जा रहा है। हमें इस सोच के साथ काम करना है कि आने वाले दिनों में हम आयात नहीं बल्कि निर्यात करेंगे। उन्होंने कहा कि जब हम एक विजन के साथ काम करते हैं, तो हमें सफलता जरूर मिलती है।

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जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास पर बल

श्री अर्जुन मुंडा ने जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास पर भी बल दिया और कहा कि कृषि शिक्षा को आजीविका व रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाना चाहिए। श्री मुंडा ने कहा कि जैव विविधता अध्ययन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एक साल में यह संस्थान शोध के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रौद्योगिकियों को जलवायु और लैंगिक स्तर पर तटस्थ होना चाहिए।

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जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़ने की जरूरत

राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने वैज्ञानिकों से उत्तर पूर्व क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक विविधता का दोहन करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रकृति के करीब प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी बल दिया और कहा कि हमें जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़ना चाहिए। उन्होंने दलहन और तिलहन से संबंधित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया, ताकि देश को दालों के निर्यात पर बहुत अधिक पैसा खर्च न करना पड़े। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान को उद्यमिता से जोड़ना होगा; और यह सब तभी संभव है जब विभिन्न संगठनों के बीच विचारों का मुक्त आदान-प्रदान हो।

असम सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने आईएआरआई, असम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आईएआरआई, असम द्वारा किया जाने वाला शोध कार्य पौधों, पशुओं और मत्स्य विविधता पर विचार करने के साथ-साथ पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायक होगा।

डीएआरई के सचिव और आईसीएआर नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने वर्चुअल माध्यम से उपस्थितजनों को संबोधित किया और आईएआरआई असम के उद्देश्यों व दायित्वों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उत्तर-पूर्व भारत में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अनुसंधान और विकास के माध्यम से तलाशने की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आईसीएआर यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा कि संस्थान तेजी से प्रगति करता रहे। इस संस्थान का खुलना आईसीएआर के इतिहास में एक यादगार दिन है। उन्होंने संस्थान के विकास से जुड़े लोगों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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