राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

चना के दामों में उछाल: MSP से ऊपर पहुंचे भाव, आगे और तेजी की उम्मीद

01 मई 2025, नई दिल्ली: चना के दामों में उछाल: MSP से ऊपर पहुंचे भाव, आगे और तेजी की उम्मीद – केंद्र सरकार द्वारा पिछले महीने चना आयात पर 10% शुल्क लगाने के बाद चना की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। निचले दामों पर बढ़ी खरीदारी ने चना के भाव को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर पहुंचा दिया है। सीजन की शुरुआत में बढ़े उत्पादन के अनुमान से चना के दाम MSP से नीचे लुढ़क गए थे, लेकिन अब बाजार में रिकवरी साफ दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चना और महंगा हो सकता है।

चना कितना महंगा हुआ?

दिल्ली में इस समय चना 5,750-5,800 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है। पिछले एक महीने में इसके दाम 150 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुके हैं। पिछले महीने चना के भाव MSP (5,650 रुपये/क्विंटल) से नीचे 5,450-5,500 रुपये तक गिर गए थे। वहीं, महाराष्ट्र की अकोला मंडी, जो चना की प्रमुख मंडी है, में चना 6,025-6,050 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। यहां एक महीने में 225 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है, जब भाव 5,800-5,825 रुपये थे।

कमोडिटी विशेषज्ञ और एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल के रिसर्च हेड इंद्रजीत पॉल के अनुसार, नई फसल की आवक के दौरान चना के दाम काफी गिर गए थे। MSP से नीचे जाने के बाद खरीदारी में तेजी आई, जिससे भाव अब MSP से ऊपर चले गए। सरकारी नीतियों ने भी चना की कीमतों को समर्थन दिया। केंद्र सरकार ने चना के आयात पर 10% शुल्क लगाया, साथ ही शुल्क-मुक्त पीली मटर के आयात की अवधि भी खत्म हो चुकी है। इन फैसलों ने चना की कीमतों में उछाल को बढ़ावा दिया।

आगे क्या होंगे चना के भाव?

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि चना की कीमतों में आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। इंद्रजीत पॉल का कहना है कि अगले महीने तक चना के दाम 200 रुपये प्रति क्विंटल और बढ़ सकते हैं, क्योंकि चना का स्टॉक सीमित है। स्टॉकिस्ट इसकी खरीदारी बढ़ा सकते हैं। India Pulses and Grains Association (IPGA) के अनुसार, पिछले एक महीने में चना महंगा हुआ है, हालांकि पिछले सप्ताह इसमें हल्की गिरावट देखी गई। फिर भी, किसानों ने चना की बिक्री कम कर दी है और मिलर भी जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि, सस्ती पीली मटर की उपलब्धता चना की कीमतों में तेजी को कुछ हद तक सीमित कर सकती है।

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