Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

‘बैंगनी क्रांति’ की सफलता ने कृषि-तकनीक स्टार्ट-अप पर ध्यान केंद्रित किया : डॉ. जितेंद्र सिंह

24 जून 2022, नई दिल्ली । ‘बैंगनी क्रांति’ की सफलता ने कृषि-तकनीक स्टार्ट-अप पर ध्यान केंद्रित किया : डॉ. जितेंद्र सिंह – केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि “बैंगनी क्रांति” ने कृषि-तकनीक स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित किया है। उच्च मौद्रिक रिटर्न के कारण, जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में किसान बड़े स्तर पर पारंपरिक खेती से लैवेंडर जैसी सुगंधित फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुगंधित फसलें सूखा और कीट प्रतिरोधी दोनों हैं और सीएसआईआर केंद्र शासित प्रदेश में इस कृषि स्टार्ट-अप वरदान को बढ़ावा देने के लिए की तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सीएसआईआर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे ऐसी ही जलवायु परिस्थितियों वाले अन्य पहाड़ी राज्यों में भी सुगंधित फसलों की खेती शुरू करने की योजना बना रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर द्वारा समर्थित केंद्र का अरोमा मिशन किसानों की मानसिकता को बदल रहा है और उनमें से अधिक से अधिक किसान कई उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले महंगे तेल निकालने के लिए लैवेंडर, लेमन ग्रास, गुलाब और गेंदे के फूल जैसी सुगंधित फसलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 9,000 रुपये प्रति लीटर बिकने वाले तेलों का उपयोग अगरबत्ती बनाने में किया जाता है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अरोमा मिशन देश भर से स्टार्ट-अप और कृषकों को आकर्षित कर रहा है और पहले चरण के दौरान, सीएसआईआर ने 6,000 हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित फसलों की खेती में मदद की तथा इसमें देश भर के 46 आकांक्षी जिलों को शामिल किया। इसमें 44,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है और किसानों का करोड़ों का राजस्व अर्जित किया गया। अरोमा मिशन के दूसरे चरण में, देश भर में 75,000 से अधिक कृषक परिवारों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से 45,000 से अधिक कुशल मानव संसाधनों को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

सीएसआईआर-आईआईआईएम ने सीएसआईआर-अरोमा मिशन के तहत जम्मू-कश्मीर के विभिन्न स्थानों पर 50 आसवन इकाइयां, 45 स्थायी और पांच घूमंतू (अस्थायी), स्थापित की हैं।

लैवेंडर की खेती ने जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक दृष्टि से दूरदराज के इलाकों में लगभग 5,000 किसानों और युवा उद्यमियों को रोजगार दिया है। 200 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 1,000 से ज्यादा किसान परिवार इसकी खेती कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण खबर:नैनो यूरिया के उपयोग से कृषि एवं पर्यावरण को फायदा