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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)सरकारी योजनाएं (Government Schemes)

किसानों के लिए उच्च मूल्य वाली किस्में ईजाद करें वैज्ञानिक – राज्यपाल राधाकृष्णन

तीन दिवसीय पूर्वी क्षेत्र किसान मेले का हुआ समापन

06 फरवरी 2024, रांची: किसानों के लिए उच्च मूल्य वाली किस्में ईजाद करें वैज्ञानिक – राज्यपाल राधाकृष्णन – केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा की पहल पर कृषि विज्ञान केन्द्र, खूँटी एवं भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची द्वारा आयोजित किए गए तीन दिवसीय मेले का सोमवार को समापन हुआ। इसमें, मुख्य अतिथि झारखंड के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि किसान ही हमारी धरा को सुरक्षित रखने में सहायक है, देश का प्रत्येक जन सदैव इनका ऋणी रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से निश्चित ही क्षेत्र के किसानों को कृषि के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोग, विकास, नवीनीकरण तथा अनुसंधानों के बारे में जानने का अवसर प्राप्त होता है, इस प्रकार के कार्यक्रमों से लाभ उठाने का पूरा प्रयास करना चाहिए, ताकि जिन उद्देश्यों से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, उसकी सिद्धि हो सके।

सम्मान निधि योजना किसानों के लिए हो रही सहायक साबित

राज्यपाल श्री राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने जनजाति क्षेत्र के प्रथम कृषि मंत्री के रूप में श्री अर्जुन मुंडा को नियुक्त कर निश्चित ही इस क्षेत्र के लिए विकास के मार्ग को अत्यधिक सुव्यवस्थित और सरल किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किसान सम्मान निधि की सालाना ₹6000 की धनराशि किसानों को कृषि कार्य करने के लिए बहुत ही सहायक साबित हो रही है।

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वैज्ञानिक उच्च मूल्य वाली किस्में विकसित करने का किया आग्रह

राज्यपाल राधाकृष्णन ने मेले में लगाये गए स्टालों का अवलोकन किया एवं स्टालकर्मियों से उनके द्वारा प्रदर्शित उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित वैज्ञानिकों एवं नीति निर्धारकों से आग्रह किया कि वह किसानों के लिए उच्च मूल्य वाली फसल किस्मों को विकसित करें, जिससे कि किसानों की आय वृद्धि में और सहायता हो। उन्होंने कहा कि राजभवन के द्वार सदा किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए खुले रहेंगे। साथ ही कृषि विश्वविद्यालय एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सदा उनके कार्य में आ रही बाधाओं को सुचारू रूप से दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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विश्व में पसंद की जाने वाली फसलों व उत्पादो को अपनाना

कार्यक्रम में उपस्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने कहा कि जिन उत्पादों की विश्व स्तर पर मांग है, हमें ऐसी फसलों और उत्पादों की पैदावार को अपनाना है। वर्तमान परिवेश में हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाकर कृषि क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा में अपना स्थान निश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को किसानों की ओर समस्या आधारित दृष्टिकोण अपनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

मेले में हजारों किसानों की रही भागीदारी

राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के निदेशक डॉ. अभिजीत कर ने काह कि इस मेले में पूर्वी भारत के राज्यों के हजारों किसानों की भागीदारी रही। विभिन्न स्टॉल प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। मेले में किसानों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इसमें खेती से संबंधित विभिन्न विषयों (उन्नत कृषि पद्धति, बागवानी, रेशम कीट पालन, पशुपालन, मत्स्यपालन, कृषि योजनाओं, मधुमक्खी पालन, लाख एवं तसर उत्पादन इत्यादि) पर किसान गोष्ठियों का आयोजन किया गया तथा कृषकों की समस्याओं का समाधान किया गया। मेले में स्वास्थ्य जांच शिविर का भी आयोजन किया गया।

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