22 अक्टूबर से देशभर में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, मिट्टी की सेहत और फसल सुरक्षा पर रहेगा फोकस
06 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: 22 अक्टूबर से देशभर में शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, मिट्टी की सेहत और फसल सुरक्षा पर रहेगा फोकस- किसानों की आय बढ़ाने, खेती को आधुनिक बनाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इसी दिशा में 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य फोकस खेतों की मिट्टी की सेहत सुधारने, फसल अवशेष प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और खेती की उत्पादकता को बेहतर बनाने पर रहेगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन में मंत्रालय की पहली व्यापक मासिक समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मंत्रालय के सभी विभागों, प्रभागों और राष्ट्रीय मिशनों के कामकाज की समीक्षा की गई। इस दौरान हर महीने के लिए वित्तीय और भौतिक लक्ष्य तय करने तथा उनकी प्रगति की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया।
किसानों तक पहुंचेगा ‘खेत बचाओ अभियान’
बैठक में बताया गया कि 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों और मैदानी कर्मचारियों को किसानों के खेतों तक पहुंचकर मिट्टी की जांच और उसके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी देने के लिए कहा गया है। अभियान में फसल अवशेष और पराली प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा मिट्टी में जैविक पदार्थ के संरक्षण पर विशेष ध्यान रहेगा। किसानों को फसल अवशेष न जलाने और पोषक तत्वों के उचित प्रबंधन के लिए जागरूक किया जाएगा।
10.77 करोड़ से ज्यादा किसानों की बनी Farmer ID
बैठक में डिजिटल कृषि से जुड़े कामों की भी समीक्षा की गई। अब तक 10.77 करोड़ से अधिक Farmer IDs बनाई जा चुकी हैं। सरकार ने कुल 14 करोड़ Farmer IDs बनाने का लक्ष्य रखा है। वहीं, मौजूदा खरीफ सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का सर्वे किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर मिट्टी की मैपिंग का काम भी जारी है और अब तक 80.3 लाख हेक्टेयर भूमि की मैपिंग पूरी हो चुकी है।
दलहन उत्पादन लक्ष्य से आगे
साल 2025-26 में दलहन उत्पादन का लक्ष्य 266 लाख टन रखा गया था, जबकि वास्तविक उत्पादन 274.09 लाख टन रहा। इसी अवधि में दलहन का क्षेत्रफल लक्ष्य 283 लाख हेक्टेयर था, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल 286.46 लाख हेक्टेयर रहा। तिलहन के मामले में 2025-26 के लिए 427 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जबकि वास्तविक उत्पादन 430.59 लाख टन रहा। तिलहन का क्षेत्रफल 308.86 लाख हेक्टेयर रहा।
खाद्य तेल उत्पादन में भी बढ़ोतरी
घरेलू खाद्य तेल उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में खाद्य तेल का घरेलू उत्पादन 121.75 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 129.96 लाख टन हो गया। ऑयल पाम के तहत 2026-27 में नए क्षेत्र के विस्तार का लक्ष्य 1.19 लाख हेक्टेयर रखा गया है। इसमें से करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पहले ही कवर किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 42 प्रतिशत है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में भी लक्ष्य से अधिक प्रगति दर्ज की गई। 2025-26 में 18.75 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य था, जबकि 20.93 लाख किसान इससे जुड़े। इसी तरह 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में आया। अब तक कुल 27.32 लाख किसान और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती से जुड़ चुका है। इसके अलावा 33,257 से अधिक कृषि सखियों/कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (CRPs) को भी इस काम से जोड़ा गया है।
बागवानी उत्पादन 370.84 मिलियन टन
बागवानी क्षेत्र में 360 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जबकि वास्तविक उत्पादन 370.84 मिलियन टन रहा। किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 50 नर्सरियों का लक्ष्य रखा गया था, जबकि 187 नई नर्सरियां स्थापित की गईं। इसी तरह नए बाग-बगीचे विकसित करने के लिए 1 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य था, जबकि 1.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नए बाग और उद्यान स्थापित किए गए।
FPO से जुड़े किसानों की संख्या बढ़ी
10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की योजना के तहत अतिरिक्त 2.40 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य था। इसके मुकाबले 30.11 लाख किसान FPO से जुड़ चुके हैं। FPO का औसत वार्षिक कारोबार भी 38 लाख रुपये से बढ़कर 141.76 लाख रुपये हो गया है।
कृषि बुनियादी ढांचे पर जोर
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत 2026-27 में 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 314 लैब, वेयरहाउस और कस्टम हायरिंग सेंटर से जुड़ी परियोजनाएं और 303 बीज उत्पादन व क्षेत्र विस्तार से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं। योजना के लिए 8,550 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें से 3,151.80 करोड़ रुपये की प्रगति दर्ज की गई है। कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत अब तक 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए 1,01,502 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे में 1.73 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है।
फसल बीमा में बढ़ा किसानों का पंजीयन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के नामांकन में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। किसानों की संख्या 2.30 करोड़ से बढ़कर 2.83 करोड़ हो गई है। वर्तमान में 2.97 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा किया गया है। बीमित राशि भी 1.45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
मिट्टी जांच पर भी फोकस
मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए अब तक 16 लाख से अधिक Soil Health Cards तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा PM-Shri स्कूलों में 1,140 मिनी सॉइल टेस्टिंग लैब स्थापित की गई हैं।‘Per Drop More Crop’ योजना के तहत 1,504.63 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया है और 4.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में लाया गया है।
कृषि विभागों और संस्थानों को ‘एक टीम’ की तरह काम करने के निर्देश
बैठक में कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। ATMA, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को ‘एक टीम’ के रूप में मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। किसान मेलों को भी ज्यादा उपयोगी, आधुनिक और किसानों की भागीदारी वाला बनाने पर जोर दिया गया। मखाना क्षेत्र में किसानों को तीन गुना तक मूल्य मिलने की बात सामने आई। इसके लिए प्रशिक्षण बढ़ाने और गुणवत्ता की क्रॉस-चेकिंग पर भी ध्यान देने को कहा गया। इसके अलावा बांस मिशन, राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, कपास क्रांति और MOVCDNER जैसी योजनाओं की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
PM धन-धान्य कृषि योजना की भी समीक्षा
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिलों की रैंकिंग 74 उत्पादन संकेतकों के आधार पर की जा रही है। बैठक में बताया गया कि जिलों का औसत स्कोर अप्रैल में 18.85 था, जो अगस्त में बढ़कर 46.89 हो गया। कम प्रदर्शन करने वाले जिलों और राज्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सीधे चर्चा करने की बात भी कही गई।
योजनाओं की हर महीने होगी निगरानी
बैठक में कृषि मंत्रालय की योजनाओं के वित्तीय और भौतिक लक्ष्यों की हर महीने समीक्षा करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को वर्ष के अंत में खर्च बढ़ाने की बजाय पूरे साल योजनाओं की प्रगति बनाए रखने के निर्देश दिए गए। जिन राज्यों में Farmer ID और डिजिटल क्रॉप सर्वे की गति कम है, वहां काम तेजी से पूरा करने को कहा गया। PM-KISAN के तहत पात्र किसानों को लाभ सुनिश्चित करने और अपात्र किसानों को सूची से हटाने पर भी जोर दिया गया।
इसके साथ ही PM-AASHA के तहत खरीद की नियमित निगरानी, बार-बार समय बढ़ाने से बचने और फसल बीमा दावों के निपटारे में पारदर्शिता व तेजी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वरिष्ठ अधिकारियों को मैदानी क्षेत्रों का दौरा कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच करने को भी कहा गया।
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