राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)फसल की खेती (Crop Cultivation)

संजीवनी धान: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला अद्भुत धान, किसानों की आय भी होगी दुगुनी

24 अगस्त 2024, छत्तीसगढ़: संजीवनी धान: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला अद्भुत धान, किसानों की आय भी होगी दुगुनी – धान की एक अनोखी किस्म ‘संजीवनी धान’ अब किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसकी खासियत यह है कि इसे खाने से मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह कैंसर कोशिकाओं की रोकथाम में भी सहायक है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने इस धान की खोज की है, जो न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी कारगर साबित हो रही है।

संजीवनी धान की विशेषताएँ:

संजीवनी धान एक सुगंधित किस्म है, जिसमें फाइटोकेमिकल्स, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-कैंसर गुण मौजूद हैं। इसके सेवन से शरीर की विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा का कहना है कि यह धान न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि इसकी खेती से किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

संजीवनी धान की खेती में किसानों को प्रति एकड़ 15-20 हजार रुपये का खर्चा आ सकता है, लेकिन इससे मिलने वाला उत्पादन और इसकी बाजार में बढ़ती मांग किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक सशक्त साधन बनेगा। खास बात यह है कि इस धान का सेवन मात्र 10 दिनों तक करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि देखी गई है।

किसान योगेश्वर चन्द्राकर का अनुभव:

महासमुंद के ग्राम कौंदकेरा के प्रगतिशील किसान योगेश्वर चन्द्राकर ने इस धान की खेती की शुरुआत की है। उन्होंने एक एकड़ में संजीवनी धान का प्रयोगात्मक रूप से उत्पादन किया है। पूरी तरह प्राकृतिक तरीकों से उन्होंने इस धान को उगाया है, जिसमें गोबर और पत्तियों से बनी खाद का उपयोग किया गया है। योगेश्वर का कहना है कि इस धान की लंबाई करीब 3 फीट है और उन्हें उम्मीद है कि एक एकड़ में 15 से 20 क्विंटल उत्पादन होगा।

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किसान योगेश्वर चन्द्राकर पहले भी ब्लैक राइस, रेड राइस, ग्रीन राइस, काली मूली, नीला आलू जैसी फसलों का उत्पादन कर चुके हैं, और उनका मानना है कि इस तरह की धान की किस्मों की खेती करने से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि समाज को स्वास्थ्य के लिए बेहतर खाद्य पदार्थ भी मिलेंगे।

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