राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

गांवों को समृद्ध बनाने वाली फसल, सरसों को सलाम

19 अगस्त 2025, नई दिल्ली: गांवों को समृद्ध बनाने वाली फसल, सरसों को सलाम – भारत में सरसों हमेशा से एक महत्वपूर्ण फसल रही है; एक ऐसी फसल जो हमारी थाली का स्वाद भी है और गांव की तरक्की का अहम हिस्सा भी। खासतौर पर हाइब्रिड सरसों, जो आज किसानों की मेहनत, उत्पादन क्षमता और आत्मगौरव की पहचान बन चुकी है। बीज और फसल सुरक्षा उत्पादों की अग्रणी  कंपनी कोर्टेवा एग्री साइंस सशक्त फसल  हाइब्रिड सरसों पर विचार कर रही है , जो किसानों की आजीविका और समुदाय को मजबूत बना रही है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा की सरसों की खेती से लेकर देश के हर रसोई घर तक, हाइब्रिड सरसों ने तिलहन खेती का रूप ही बदल दिया है। पारंपरिक किस्मों की तुलना में यह 16–20% तक अधिक पैदावार देती है, तेल की मात्रा भी 2 से 2.5% तक अधिक होती है, और किसानों की सालाना शुद्ध आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है। ऐसे समय में, जब कई राज्यों में दामों की अनिश्चितता और फसल रोग बड़ी चुनौती बने हुए हैं, हाइब्रिड सरसों किसानों को स्थिरता और नई उम्मीद दे रही है।

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हाइब्रिड सरसों के लिए 5 से 25 अक्टूबर के बीच में बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जब खेत में नमी और तापमान अनुकूल होते हैं। इस अवधि में बोई गई हाइब्रिड सरसों ने किसानों को लगातार बेहतर लाभ दिया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश के वे किसान, जो समय पर बुवाई करते हैं और समुचित कृषि पद्धतियाँ अपनाते हैं, उन्हें न सिर्फ ज्यादा उपज मिल रही है, बल्कि बाजार में बेहतर दाम भी मिल रहे हैं।

हरियाणा के किसान श्री देवेंद्र सिंह कहते हैं, “मैं पिछले दस साल से हाइब्रिड सरसों की खेती कर रहा हूं क्योंकि इससे पैदावार ज्यादा होती है और तिलहन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बेहतर मिलती हैं। हाइब्रिड अपनाने से जो अतिरिक्त आमदनी हुई, उससे मैंने ट्रैक्टर खरीदा, बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया, और घर में कई तरह के सुधार किए।“

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इस फसल की अहमियत सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं है। यह ग्रामीण कृषि-रिटेल नेटवर्क एवं मंडियों को सशक्त बनाती है और गाँवों में आमदनी का एक स्थिर स्रोत बनती है। जिन क्षेत्रों में सरसों सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि जीवनशैली और संस्कृति का हिस्सा है, वहाँ हाइब्रिड किस्में तकनीकी सुधार के साथ स्थानीय गौरव और नई संभावनाओं का प्रतीक बन चुकी हैं।

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भारत जब खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनने और बदलते मौसम के अनुरूप खेती अपनाने की ओर अग्रसर है, तब हाइब्रिड सरसों एक ऐसा समाधान पेश करती है जो स्थानीय सफलताओं पर आधारित है। यह फसल हमें याद दिलाती है कि जब नवाचार को भरोसे का साथ मिलता है, तो क्या कुछ संभव हो सकता है। यह एक आह्वान है ,उत्कृष्ट बीजों, क्षेत्रीय सलाहों और किसान-केन्द्रित उपायों में निवेश करने का, ताकि तिलहन खेती का भविष्य सुरक्षित हो सके।

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