किसानों के लिए राहत भरी खबर, होर्मुज पार कर भारत आ रहे यूरिया-डीएपी से लदे 4 जहाज
23 जून 2026, नई दिल्ली: किसानों के लिए राहत भरी खबर, होर्मुज पार कर भारत आ रहे यूरिया-डीएपी से लदे 4 जहाज – खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद यूरिया, डीएपी और सल्फर से लदे चार बड़े मालवाहक जहाज सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों के भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद खाद की आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, ये जहाज देश के विभिन्न प्रमुख बंदरगाहों पर पहुंचेंगे। इनमें कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाह शामिल हैं। बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद खाद की खेप को तेजी से उतारकर राज्यों और वितरण एजेंसियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है खाद की स्थिति
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 22 जून 2026 तक देश में कुल रासायनिक उर्वरकों का उपलब्ध भंडार 196.08 लाख टन दर्ज किया गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में उपलब्ध 168.67 लाख टन स्टॉक से काफी अधिक है। वर्तमान में देश में यूरिया का भंडार 81.44 लाख टन, डीएपी 20.92 लाख टन, एनपीके 55.91 लाख टन, एमओपी 12.68 लाख टन और एसएसपी 25.13 लाख टन है। इससे स्पष्ट है कि खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं।
खाद की मांग के साथ बढ़ी बिक्री
खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने के साथ उर्वरकों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1 मार्च से 21 जून 2026 के बीच देशभर में 153.4 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 140.2 लाख टन था। यानी इस वर्ष बिक्री में 13.2 लाख टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में यूरिया की बिक्री 79.1 लाख टन रही। वहीं एनपीके उर्वरकों की बिक्री 34.8 लाख टन और डीएपी तथा टीएसपी की संयुक्त बिक्री 19.8 लाख टन दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि खरीफ सीजन में किसानों द्वारा उर्वरकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
घरेलू उत्पादन और आयात पर समान फोकस
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात व्यवस्था को भी मजबूत बनाए रखा है। इसी अवधि में देश में 133.12 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन किया गया है। वहीं 43.69 लाख टन उर्वरकों की आयातित खेप भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुकी है।
सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन और आयात के बीच संतुलन बनाकर किसानों तक उर्वरकों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। यही कारण है कि खरीफ सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए दोनों मोर्चों पर लगातार काम किया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर मजबूत की गई खरीद व्यवस्था
उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रणनीति अपनाई है। हाल ही में वैश्विक निविदा प्रक्रिया के तहत 17.70 लाख टन यूरिया की खरीद का अनुबंध किया गया है। इसके अलावा खरीफ सीजन के लिए 90 लाख टन से अधिक यूरिया और पी एंड के श्रेणी के उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है।
इस उद्देश्य से विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों के सहयोग से विभिन्न देशों के साथ आपूर्ति चैनल विकसित किए गए हैं, ताकि किसी भी वैश्विक व्यवधान का असर भारतीय किसानों पर न पड़े।
कई देशों से हो रही खाद की आपूर्ति
भारत ने यूरिया की आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड सहित कई देशों के साथ व्यवस्था की है। वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब जैसे देशों से सुनिश्चित की गई है।
सरकार ने कहा है कि राज्यों, सहकारी संस्थाओं और वितरण एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर खाद उपलब्धता की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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