राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

23 अगस्त को पीएम मोदी करेंगे ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ की शुरुआत, राज्यों को मिले सख्त निर्देश

16 अगस्त 2025, नई दिल्ली: 23 अगस्त को पीएम मोदी करेंगे ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ की शुरुआत, राज्यों को मिले सख्त निर्देश – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ की शुरुआत करेंगे। इस मिशन की तैयारी को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई। इसमें राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, वैज्ञानिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में खाद और यूरिया की कमी, बायोस्टुमिलेंट (जैविक उत्तेजकों) की प्रमाणिकता, आगामी रबी फसल के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की तैयारियां, दलहन-तिलहन उत्पादन, अगले 5 साल की कृषि कार्य योजना, फसल बीमा योजना, और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए टोल फ्री नंबर जैसे अहम विषयों पर चर्चा की गई।

विकसित कृषि संकल्प अभियान की घोषणा

केंद्रीय मंत्री ने बैठक की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ की। उन्होंने जानकारी दी कि रबी फसलों के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस 15 और 16 सितंबर को दिल्ली में होगी और अभियान की शुरुआत 3 अक्टूबर (विजय पर्व) से होगी, जो 18 अक्टूबर (धनतेरस) तक चलेगा।

उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इस अभियान की गंभीरता से तैयारी करें। श्री चौहान ने बताया कि वह सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहेंगे कि उनके कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में जरूर शामिल हों। साथ ही, रबी फसलों के लिए खाद की जरूरतों का आंकलन पहले से कर लें ताकि सम्मेलन में उस पर चर्चा हो सके।

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प्राकृतिक खेती मिशन की तैयारियां

बैठक में 23 अगस्त को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए जा रहे राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि इस मिशन के लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं। उन्होंने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के तहत 100 जिलों में चल रही प्राकृतिक खेती की प्रगति की भी समीक्षा की।

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यूरिया और खाद की समस्या

बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों ने अतिरिक्त यूरिया की मांग की। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने प्राकृतिक आपदा के कारण फसल नुकसान की जानकारी दी और अतिरिक्त सहायता राशि की मांग भी रखी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूरिया की अधिक मांग के पीछे दो कारण हो सकते हैं। पहला अच्छी बारिश के कारण बुआई में बढ़ोतरी और दूसरा यूरिया का गैर-कृषि कार्यों में दुरुपयोग हो सकता है।  उन्होंने कहा कि खेती के लिए यदि यूरिया की जरूरत है तो मंत्रालय उसकी आपूर्ति जरूर करेगा, लेकिन दुरुपयोग की स्थिति में सख्त कार्रवाई होगी। राज्यों से यूरिया की निगरानी के लिए समितियां बनाने और सिस्टम मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

नकली खाद और बायोस्टुमिलेंट पर सख्ती

केंद्रीय मंत्री ने नकली खाद और जैव उत्तेजकों (बायोस्टुमिलेंट) पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बाजार में करीब 30,000 जैविक उत्पाद बिक रहे हैं, जिनमें से अब तक सिर्फ 600 ही प्रमाणित हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल प्रमाणित उत्पाद ही किसानों तक पहुंचें।

अगर कोई दुकानदार खाद के साथ जबरन दवा बेचता है, तो यह भी गलत है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्यों को भी इस दिशा में सख्त कदम उठाने के लिए कहा गया।

दलहन-तिलहन और 5 साल की कृषि योजना

मंत्री ने कहा कि दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, ताकि देश को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे इन अभियानों और योजनाओं का खुद नेतृत्व करें और किसानों तक इनका लाभ पहुंचाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रगतिशील किसानों, विशेषज्ञों और सुझावों के आधार पर अगले 5 साल की कृषि कार्य योजना तैयार करें।

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बीमा योजना और ट्रोल फ्री नंबर

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों को बीमा की राशि डिजिटल भुगतान के जरिए सीधे मिले। यदि बीमा कंपनी या राज्य सरकार क्लेम में देरी करती है तो किसानों को 12% अतिरिक्त ब्याज भी दिया जाएगा। साथ ही, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए टोल फ्री नंबर का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के अंत में  शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री के ‘स्वदेशी अपनाओ’ आह्वान को दोहराया और कहा कि किसी भी कीमत पर किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से समझौता नहीं होगा। सरकार कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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